फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

शारदीय नवरात्रि 2026: अखंड ज्योत जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान, भूलकर भी न करें ये काम

Mon, 05 Oct 2026 10:37 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 05 Oct 2026 10:37 PM IST
सार

नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान दीपक की लौ को लगातार जलाए रखना शुभ होता है। हालांकि, अखंड ज्योत जलाते समय कुछ जरूरी नियमों और सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।

विज्ञापन
Akhand Jyot Rules Never Make These Mistakes During Navratri  avratri Lamp
अखंड ज्योति जलाने के नियम - फोटो : amar ujala

नवरात्रि और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। अखंड ज्योति का अर्थ ऐसी ज्योति से है, जिसे किसी संकल्प या अनुष्ठान की अवधि तक लगातार प्रज्वलित रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक की यह लौ पूजा स्थल में सकारात्मक और पवित्र वातावरण बनाए रखने में सहायक मानी जाती है। हालांकि, अखंड ज्योति जलाते समय कुछ नियमों और सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

Akhand Jyot Rules Never Make These Mistakes During Navratri  avratri Lamp
अखंड ज्योति यात्रा - फोटो : अमर उजाला

अखंड ज्योति जलाने का क्या महत्व है?
हिंदू धर्म में किसी भी पूजा या धार्मिक अनुष्ठान में दीपक जलाने को शुभ माना गया है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी अंधकार को दूर करने के साथ सकारात्मकता का प्रतीक है। इसी वजह से नवरात्रि, विशेष पूजा, अनुष्ठान या किसी संकल्प के दौरान अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में अखंड ज्योति जलाने से सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है। भक्त इसे देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और अपने संकल्प का प्रतीक भी मानते हैं।

Akhand Jyot Rules Never Make These Mistakes During Navratri  avratri Lamp
अखंड ज्योति - फोटो : Adobe Stock

अखंड ज्योति जलाने के नियम
अखंड ज्योति प्रज्वलित करने से पहले भगवान गणेश, भगवान शिव और मां दुर्गा का ध्यान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद श्रद्धा के साथ दीपक जलाएं। धार्मिक परंपरा में देवी दुर्गा से जुड़ा एक मंत्र भी जपने की मान्यता है। 

“ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।”
अखंड ज्योति के लिए घी और तेल के दीपक की दिशा को लेकर भी धार्मिक मान्यता है। परंपरा के अनुसार, घी का दीपक दाईं ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखा जाता है। यदि किसी विशेष पूजा, अनुष्ठान या संकल्प के लिए अखंड ज्योति जलाई गई है, तो संकल्प पूरा होने तक उसे बुझने से बचाने की कोशिश की जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Akhand Jyot Rules Never Make These Mistakes During Navratri  avratri Lamp
अखंड ज्योति - फोटो : Adobe Stock

अखंड ज्योति को अकेला छोड़ने से बचें
अखंड ज्योति जलाने के बाद उसकी नियमित देखभाल करना जरूरी है। दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल रहे, इसका ध्यान रखें। ज्योति को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां तेज हवा न लगे और दीपक गिरने का खतरा न हो। दीपक को सुरक्षित रखने के लिए उपयुक्त कांच की ढाल या दीपक-कवर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसे इस तरह न ढकें कि गर्मी या आग का खतरा बढ़ जाए। अखंड ज्योति को बच्चों, पालतू जानवरों और ज्वलनशील सामान से दूर रखना भी जरूरी है।

विज्ञापन
Akhand Jyot Rules Never Make These Mistakes During Navratri  avratri Lamp
अखंड ज्योति - फोटो : Adobe Stock

पूजा स्थल चुनते समय रखें ध्यान
अखंड ज्योति हमेशा साफ-सुथरे और व्यवस्थित पूजा स्थान पर जलाना उचित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा स्थल के आसपास शौचालय या स्नानघर न हो तो बेहतर माना जाता है। साथ ही, दीपक को दरवाजे, पर्दे, कागज या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए। पूजा के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखना धार्मिक नियमों जितना ही जरूरी है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed