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Kumbh Sankranti 2025: कुंभ संक्रांति कब? जानें सूर्य देव को अर्घ्य देने के सही नियम

Wed, 12 Feb 2025 06:24 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 12 Feb 2025 06:24 AM IST
सार

Kumbh Sankranti 2025: हिंदू धर्म में कुंभ संक्रांति का दिन सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि कुंभ संक्रांति के अवसर पर सूर्य को अर्घ्य देने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

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Kumbh Sankranti 2025 Date Time Surya Arghya Niyam or Rules in Hindi
कुंभ संक्रांति 2025 - फोटो : amar ujala

Kumbh Sankranti Surya Arghya Niyam: हिंदू धर्म के शास्त्रों में कुंभ संक्रांति को एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण दिन माना गया है। यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं । इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। कुंभ संक्रांति के अवसर पर भगवान सूर्य की पूजा और उपासना का विशेष महत्व है, और इस दिन व्रत भी रखा जाता है।



धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंभ संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने और उन्हें अर्घ्य अर्पित करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। भगवान सूर्य की कृपा से व्यक्ति को स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है, जिससे जीवन में खुशहाली और करियर में सफलता बनी रहती है। इस दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है।

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Kumbh Sankranti 2025 Date Time Surya Arghya Niyam or Rules in Hindi
कुंभ संक्रांति 2025 की तिथि - फोटो : amar ujala

कुंभ संक्रांति तिथि   

कल 12 फरवरी को भगवान सूर्य मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह परिवर्तन रात 10 बजकर 3 मिनट पर होगा। इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, इस वर्ष कुंभ संक्रांति 13 फरवरी को मनाई जाएगी।

Kumbh Sankranti 2025 Date Time Surya Arghya Niyam or Rules in Hindi
कुंभ संक्रांति 2025 की तिथि - फोटो : अमर उजाला

कुंभ संक्रांति का पुण्य और महापुण्य काल
हिंदू पंचांग के अनुसार, कुंभ संक्रांति के दिन पुण्य काल का समय दोपहर 12:36 बजे से लेकर शाम 6:10 बजे तक रहेगा। वहीं, महापुण्य काल शाम 4:19 बजे से 6:10 बजे तक होगा। इस बार कुंभ संक्रांति पर पुण्य काल 5 घंटे 34 मिनट और महापुण्य काल 2 घंटे 51 मिनट का होगा।

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कुंभ संक्रांति 2025 की तिथि - फोटो : amar ujala

कुंभ संक्रांति का महत्व
कुंभ संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। हिंदू मान्यता के अनुसार, यदि इस दिन पूरे मनोभाव से भगवान सूर्य की पूजा की जाए, तो घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।

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को अर्घ्य देने के नियम - फोटो : अमर उजाला

भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के नियम

  • कुंभ संक्रांति के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें।
  • सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना जाता है। 
  • इस दिन तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, कुमकुम, अक्षत, दूध, तिल, गुड़ और रोली डालें।
  • अर्घ्य देते समय ध्यान रखें कि आपका मुख पूर्व दिशा की ओर हो।
  • फिर लोटे को सिर से थोड़ा नीचे रखते हुए धीरे-धीरे जल गिराते हुए भगवान को अर्घ्य अर्पित करें। 
  • इस दौरान भगवान सूर्य के वैदिक मंत्रों का जाप अवश्य करें और सूर्य चालिसा का पाठ करें।
  • धूप, दीप और कपूर से भगवान सूर्य की आरती करें।
  • भगवान को फल, मिठाई और घर पर बने प्रसाद का भोग लगाएं।
  • अंत में प्रसाद का वितरण करें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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