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Shani Dev : इन देवी-देवताओं के भक्तों से दूर रहते हैं शनिदेव, नहीं करते परेशान

Fri, 27 Sep 2024 05:05 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 27 Sep 2024 05:05 PM IST
सार

शनिदेव न्याय के देवता कहे जाते हैं और वे कर्मों के अनुसार जातकों को फल प्रदान करते हैं। शनिदेव अच्छे कर्म करने वाले जातक को अच्छा और जो व्यक्ति बुरे कर्मों में लिप्त रहता है उसे दंड भी देते हैं।

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Shani Dev Worship These Gods to remove sade sati of Shani Dev in Hindi disprj
shani dev - फोटो : amar ujala

विस्तार

Shani Dev Se Judi Kathaein: सूर्य पुत्र और यमराज के भ्राता शनिदेव को कर्मफलदाता कहा जाता है। शनिदेव न्याय के देवता कहे जाते हैं और वे कर्मों के अनुसार जातकों को फल प्रदान करते हैं। शनिदेव अच्छे कर्म करने वाले जातक को अच्छा और जो व्यक्ति बुरे कर्मों में लिप्त रहता है उसे दंड भी देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ देवी- देवताओं की पूजा करने से शनिदेव की कुदृष्टि नहीं पड़ती और वे जातकों को काम कष्ट देकर उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं। 

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Shani Dev Worship These Gods to remove sade sati of Shani Dev in Hindi disprj
shanidev - फोटो : freepik

भगवान शिव
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने शनिदेव को कर्म दंडाधिकारी का पद सौंपा था। धार्मिक कथाओं के अनुसार सूर्यदेव ने योग्यतानुसार अपने पुत्रों कि विभिन्न लोकों का आधिपत्य प्रदान किया लेकिन शनिदेव ने अपने पिता की आज्ञा की अवहेलना की और अन्य लोकों पर भी विजय प्राप्त कर ली। सूर्यदेव ने भगवान शिव से शनि को सही मार्ग दिखाने को कहा। इसके बाद भगवान शिव ने शनिदेव से युद्ध करने के लिए अपनी टोली भेजी, लेकिन शनिदेव ने उन सभी को हरा दिया। तब भगवान शिव को शनिदेव से युद्ध करना पड़ा। इस युद्ध में शनिदेव ने भगवान शिव पर घातक दृष्टि डाली, तब महादेव ने अपनी तीसरी आंख खोली और शनि तथा उनके सभी गणों को नष्ट कर दिया। 

Shani Dev Worship These Gods to remove sade sati of Shani Dev in Hindi disprj
shanidev - फोटो : अमर उजाला

हनुमान जी 
पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमानजी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। उस समय शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया था कि वे कभी उनकी ओर नहीं देखेंगे, लेकिन वे अपना यह वचन भूल गये और डेढ़ वर्ष तक हनुमानजी को कष्ट देते रहे। ऐसे में हनुमान जी ने अपना दिमाग लगाकर उन्हें अपने सिर में बैठने की जगह दी। एक बार शनिदेव हनुमानजी के सिर पर बैठ गए  तब हनुमान जी ने एक भारी पर्वत उठाकर अपने सिर पर रख लिया। शनिदेव पर्वत के भार से कराहने लगे और हनुमान जी से क्षमा मांगी। जब शनिदेव ने हनुमानजी और उनके अनुयायियों को कभी परेशान न करने का वचन दिया तो हनुमानजी ने उन्हें मुक्त कर दिया।

Shani Dev Worship These Gods to remove sade sati of Shani Dev in Hindi disprj
पीपल - फोटो : freepik

पीपल
पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि पिप्लाद के माता-पिता की उनके बचपन में ही मृत्यु हो गई थी। जैसे-जैसे वह बड़े हुए , उन्हें यह ज्ञात हुआ है कि माता-पिता की मृत्यु शनि की दशा के कारण हुई थी। जब यह बात पिप्लाद को पता चली तो वह बहुत क्रोधित हुए और ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर घोर तपस्या करने लगे।  जब ब्रह्माजी उनसे प्रसन्न हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा तो पिप्लाद ने ब्रह्मदंड मांगा और पीपल के पेड़ पर बैठे शनिदेव पर ब्रह्मदंड मारा। परिणामस्वरूप शनिदेव के पैर टूट गए। तब शनिदेव दुखी होकर भगवान शिव की ओर मुड़े, जिन्होंने आकर पिप्लाद के क्रोध को शांत किया और शनिदेव की रक्षा की। तभी से शनि पिप्लाद से भयभीत रहने लगे।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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