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Pradosh Vrat 2021: कब है नववर्ष का पहला प्रदोष व्रत, जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Mon, 04 Jan 2021 10:50 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 04 Jan 2021 10:50 PM IST
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Pradosh Vrat 2021 date muhurat timing and religious significance
प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

Pradosh Vrat 2021: नए साल का पहला प्रदोष व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। प्रत्येक माह में प्रदोष व्रत दो बार आता है। यह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। 10 जनवरी को पौष मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। प्रदोष व्रत में विधि विधान के साथ भगवान शिव की पूजा होती है। 

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Pradosh Vrat 2021 date muhurat timing and religious significance
प्रदोष व्रत का मुहूर्त 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
प्रदोष व्रत का मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - 10 जनवरी दिन रविवार को शाम 04 बजकर 52 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 11 जनवरी दिन सोमवार को दोपहर 02 बजकर 32 मिनट तक
Pradosh Vrat 2021 date muhurat timing and religious significance
प्रदोष व्रत पूजा विधि - फोटो : Facebook/Shree Dwarkadhish Temple
प्रदोष व्रत पूजा विधि

प्रदोष व्रत करने के लिए जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें। भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।

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भगवान शिव के मंत्र - फोटो : Social media
भगवान शिव के मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ 
ॐ नमः शिवाय। ॐ आशुतोषाय नमः।
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प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व - फोटो : Pixabay
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है शाप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। 

 

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले साधक पर सदैव भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसका दु:ख दारिद्रता दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है, जो साधक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हुए उसका कल्याण करती हैं।

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