पौष मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कहा जाता है जो व्यक्ति सफला एकादशी का व्रत रखता है। उसकी सभी मनोकामनाएं सफल होती हैं। सफला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु जी के लिए रखा जाता है। इस दिन विधिवत उनकी आराधना होती है। आइए जानते हैं सफला एकादशी व्रत विधि, मुहूर्त, महत्व और कथा।
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Saphala Ekadashi 2021 Date: कब है सफला एकादशी, जानें तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व
Sun, 03 Jan 2021 07:38 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रुस्तम राणा
Updated Sun, 03 Jan 2021 07:38 AM IST
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सफला एकादशी 2021
- फोटो : अमर उजाला
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सफला एकादशी 2021
- फोटो : सोशल मीडिया
कब है सफला एकादशी 2021 (saphala ekadashi 2021 date)
हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल सफला एकादशी व्रत पौष माह कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल 9 जनवरी को सफलता एकादशी व्रत रखा जाएगा।
सफला एकादशी मुहूर्त 2021
- फोटो : अमर उजाला
सफला एकादशी मुहूर्त (saphala ekadashi muhurat 2021)
एकादशी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 08, 2021 को रात 9:40 बजेएकादशी तिथि समाप्त - जनवरी 09, 2021 को शाम 7:17 बजे तक
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सफला एकादशी व्रत विधि
- फोटो : सोशल मीडिया
सफला एकादशी व्रत विधि (saphala ekadashi vrat vidhi)
- सफला एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्यदेव को जल दें।
- इसके बाद व्रत-पूजन का संकल्प लें।
- सुबह भगवान अच्युत की पूजा-अर्चना करें।
- भगवान को धूप, दीप, फल और पंचामृत आदि अर्पित करें।
- नारियल, सुपारी, आंवला अनार और लौंग आदि से भगवान अच्युत को अर्पित करें।
- रात्रि जागरण कर श्री हरि के नाम के भजन करें।
- अगले दिन द्वादशी पर व्रत खोलें।
- गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं, उन्हेंर दान-दक्षिणा दें।
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सफला एकादशी का महत्व
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सफला एकादशी का महत्व (significance saphala ekadashi)
पद्म पुराण में सफला एकादशी व्रत का महत्व बताया गया है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया है कि सफला एकादशी व्रत के देवता श्री नारायण हैं। जो व्यक्ति सफला एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है और रात्रि में जागरण करता है, ईश्वर का ध्यान और श्री हरि के अवतार एवं उनकी लीला कथाओं का पाठ करता है उनका व्रत सफल होता है। इस प्रकार से सफला एकादशी का व्रत करने वाले पर भगवान प्रसन्न होते हैं। व्यक्ति के जीवन में आने वाले दुःखों को पार करने में भगवान सहयोग करते हैं। जीवन का सुख प्राप्त कर व्यक्ति मृत्यु के पश्चात सद्गति को प्राप्त होता है।