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शिमला: जाखू में क्यों मनाया जाता है दशहरा? हनुमान जी से जुड़ी वह पौराणिक कथा, जो इस पहाड़ी को बनाती है खास

Tue, 20 Oct 2026 01:23 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 20 Oct 2026 01:23 PM IST
सार

शिमला का जाखू मंदिर भगवान हनुमान की भक्ति और रामायण से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। जानिए संजीवनी की तलाश में हनुमान जी की यात्रा से जुड़ी कथा और जाखू में दशहरे के धार्मिक महत्व की रोचक कहानी।

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दशहरे पर क्यों याद आते हैं बजरंगबली? - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

शिमला की सबसे ऊंची पहाड़ियों में शुमार जाखू में दशहरा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, रामायण की कथा और भगवान हनुमान से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताओं का प्रतीक है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पहाड़ी पर जब श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन करने पहुंचते हैं, तो यहां की धार्मिक महत्ता और भी खास हो जाती है।

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जाखू मंदिर शिमला। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
संजीवनी की तलाश में हिमालय पहुंचे थे हनुमान जी
रामायण की कथा में एक ऐसा प्रसंग आता है, जब लंका में भगवान श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध चल रहा था। इसी दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। उनके प्राण बचाने के लिए वैद्य सुषेण ने संजीवनी बूटी लाने को कहा। इसके बाद भगवान हनुमान संजीवनी की तलाश में हिमालय की ओर निकल पड़े।
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हनुमान मंदिर जाखू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
जाखू मंदिर से जुड़ी स्थानीय पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी यात्रा के दौरान हनुमान जी इस पहाड़ी पर रुके थे। कहा जाता है कि यहां उनकी मुलाकात यक्ष ऋषि से हुई थी। इस प्रसंग के कारण जाखू को भगवान हनुमान की यात्रा से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है। यह कथा ही जाखू की धार्मिक पहचान को विशेष बनाती है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पहाड़ी केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि रामायण की स्मृतियों से जुड़ा आस्था का स्थान भी है।
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जाखू मंदिर, शिमला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जाखू में दशहरे का क्या है महत्व?
दशहरा यानी विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। भगवान हनुमान श्रीराम के परम भक्त हैं और रामायण में उनकी भूमिका अद्वितीय है। यही कारण है कि जाखू जैसे हनुमान मंदिर में दशहरे का पर्व विशेष धार्मिक भाव के साथ मनाया जाता है। यहां दशहरा मनाने का भाव केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है। यह भगवान श्रीराम के आदर्शों, हनुमान जी की निष्ठा और धर्म की विजय का संदेश भी देता है। श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और बजरंगबली का आशीर्वाद लेते हैं।
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जाखू मंदिर में पिछले साल के दशहरे का नजारा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
पहाड़ की चोटी पर विराजमान हैं विशाल हनुमान
शिमला की जाखू पहाड़ी पर स्थित हनुमान मंदिर दूर से ही अपनी भव्य प्रतिमा के कारण नजर आता है। यहां स्थापित विशाल हनुमान प्रतिमा शहर की पहचान बन चुकी है। पहाड़ी पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को एक ओर मंदिर की आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है, तो दूसरी ओर आसपास की पहाड़ियों और शिमला के खूबसूरत नजारों का दीदार भी होता है। दशहरे के अवसर पर इस धार्मिक स्थल का महत्व और बढ़ जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यहां दर्शन करना, पूजा-अर्चना करना और पर्व के धार्मिक संदेश को याद करना विशेष अनुभव होता है।
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