मार्च का लगभग आधा महीना बीत चुका है, लेकिन हिमाचल के ऊंचाई वाले भागों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। इससे राज्य में फिर से ठंड बढ़ गई है। शिमला से सटा प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुफरी बर्फ से लकदक है। बर्फ के दीदार के लिए पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं।
हालांकि कोरोना वायरस के खौफ के चलते पूरी एहतियात बरती जा रही है। पर्यटक यहां घुड़सवारी, स्केटिंग आदि का लुत्फ उठा रहे हैं। हालांकि कोरोना वायरस के खौफ के चलते पूरी एहतियात बरती जा रही है। पर्यटक यहां घुड़सवारी, स्केटिंग आदि का लुत्फ उठा रहे हैं।
चेरी, प्लम और नाशपाती की सेटिंग (फूल से फल बनने की प्रक्रिया) भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। तापमान में गिरावट से फ्लावरिंग(पुष्पण) पर विपरीत असर पड़ा है। मौसम के रुख में आए बदलाव के कारण बागवानों को इस साल सेब की फसल प्रभावित होने का डर सताने लगा है। इन दिनों कुफरी, फागू, रितेश, धरेच और ठियोग के निचले क्षेत्रों में सेब के पौधों में फ्लावरिंग की तैयारी है।
अच्छी फसल के लिए इस समय 15 डिग्री से अधिक तापमान की जरूरत है लेकिन बार-बार हिमपात व बारिश से पारा काफी नीचे लुढ़कने से उपयुक्त तापमान नहीं मिल पा रहा है। बादाम, चेरी, आडू, प्लम जैसे गुठलीदार फलों की फ्लावरिंग चरम पर है लेकिन लगातार बढ़ती ठंड से फलों की सेटिंग बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
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कुफरी में सैलानी
- फोटो : अमर उजाला
पिछले तीन दिनों से तेज हवाओं के चलने व ओलावृष्टि से गुठलीदार फलों के फूलों को भारी क्षति पहुंची है। धमांदरी पंचायत के प्रदीप नेगी, विक्रम मनसागर, चमन शर्मा, आकाश, प्रताप खाची, मोहन लाल, भूप सिंह बुंदेल, सूरत सिंह, देवेंद्र भवानी और विजेश का कहना है कि गुठलीदार फलों की पीक फ्लावरिंग पर लगातार बारिश से परागण प्रक्रिया प्रभावित हो रही हैं और तेज हवाओं से करीब 30 से 40 प्रतिशत फूल झड़ गए हैं।