राजधानी शिमला से करीब 35 किलोमीटर दूर हलोग धामी में वीरवार को पत्थर मेले का आयोजन किया गया। यह ऐसा अजीब खेल है, जब तक खून न बहने लगे तब तक पत्थरों की बारिश नहीं रुकती।
पत्थरों का यह मेला दीपावली के एक दिन बाद खेला जाता है। मेला देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़े। 25 मिनट तक दोनों तरफ से पत्थर बरसाए गए। इस बीच कनोड़ी के सुरेश शर्मा को पत्थर लगा।
खून की धारा बहने लगी तो सुरेश को खेल का चौर में स्थित सत्ती स्मारक पर लाकर उसके खून से तिलक किया गया।मेला देखने के लिए सुन्नी, अर्की और राजधानी शिमला से भी लोग पहुंचे थे।पुलिस के पहरे में इस धार्मिक परंपरा को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करवाया गया।
दोपहर बाद करीब चार बजे पत्थर का मेला शुरू हुआ जिसमें धमेड़ (धामी) की ओर से टीम में शामिल कनोड़ी के सुरेश शर्मा (धमेड़ टीम) के सिर पर पत्थर लगने पर पत्थरबाजी बंद करने का इशारा किया गया। जमोगी और दरबारी धामी की टीम के सभी खिलाड़ी स्मारक के पास एकत्र हुए और ढोल नगाड़ों की थाप पर जमकर नाचे।
धामी रियासत के उत्तराधिकारी कंवर जगदीप सिंह, मेला कमेटी कार्यकारिणी के पदाधिकारी भगत राम वर्मा, लेख राम वर्मा, सुंदर लाल शर्मा, देवेेंद्र भारद्वाज, रणजीत सिंह कंवर, खड़क सिंह कंवर, अश्वनी, दिनेश कुमार और राजेश शर्मा ने मेले की इस परंपरा को पूरा करने का कार्य किया। तिलक करने के बाद सुरेश शर्मा को धामी सीएचसी में ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया।