हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कर्मचारी और छात्र जब विवि परिसर में पुहंचे तो चारों ओर लाशें पड़ी देख उनके रौंगटे खड़े हो गए। विश्वविद्यालय में एसएफआई की विवि इकाई की ओर से शुरू कि या गया 48 घंटे का क्रमिक अनशन शुक्रवार को सौ दिन पूरे कर गया। लगातार परीक्षाओं के दिनों में अपनी मांगों को लेकर भूखे प्यासे बैठे छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करने के विवि प्रशासन तथा कुलपति के रवैये के खिलाफ संगठन ने रैली निकाली और शव धरना दिया।
इसमें शामिल छात्र व छात्रा कार्यकर्ताओं ने सिर्फ तालियां बजाकर और उसके बाद पुस्तकालय के बाहर सड़क में चुनी ओड़ कर अपना विरोध जताया। इस धरने में शामिल हुए छात्र नेता नोवल, विपिन सहित अन्य नेताओं ने कहा कि सिर्फ मुर्दों की कोई मांग नहीं होती, इसलिए वे अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए लगातार भूखे प्यासे रहकर छात्र हित के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
छात्र नेताओं का कहना है कि फीस में एक मुश्त 1400 गुणा की बढ़ोतरी, छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाए जाने, फीस का विरोध करने पर सात छात्रों का दो साल पूर्व निष्कासन करना कहां तक सही फैसला है। एसएफआई मांग कर रही है कि फीस बढ़ोतरी पर बनी हाई पॉवर कमेटी रिपोर्ट सार्वजनिक हो, एससीए चुनाव बहाल हो और निष्कासन वापस लेने के साथ ही विवि में रिक्त चल रहे दो सौ से अधिक शिक्षकों के पदों को तुरंत भरा जाए, हर विभाग में कम से कम क्लास रूम लैब जैसी आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाई जाए।
इन आम छात्रों से जुड़ी मांगों का नजरअंदाज करने से जाहिर है कि कुलपति को सिर्फ अपनी कुर्सी, और राजनीतिक रोटियां सेंकने से मतलब है।
विवि परिसर में भारी संख्या में तैनात पुलिस जवानों की मौजूदगी में एसएफआई ने यह विरोधी रैली निकाली और धरना दिया। चूंकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था इसलिए पुलिस ने भी इसमें हस्तक्षेप नहीं किया। समरहिल चौक पर हुई हिंसा के बाद से परिसर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए है।