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Shimla News: सड़कों पर हांफने लगीं परिवहन निगम की बसें
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-टायर, बैटरी और कलपुर्जों की कमी, आपूर्ति कम मिलने का नजर आ रहा असर
-बसों की समय से नहीं हो पा रही मरम्मत, विक्रेता की देनदारियों का भुगतान नहीं कर पा रहा एचआरटीसी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम की पुरानी डीजल बसें मरम्मत के अभाव में सड़कों पर जगह-जगह हांफने लगी हैं। राजधानी शिमला की सड़कों पर ही औसतन हर रोज एचआरटीसी की बसें खराब हो रही हैं। इससे शहर का ट्रैफिक प्रभावित होने के साथ ही एचआरटीसी की बसों में सफर करने वाले यात्रियों को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बसों के जगह-जगह हांफने की मुख्य वजह डिपो को जरूरत के हिसाब से नई बैटरी, कलपुर्जे और टायर उपलब्ध न होना है। स्पेयर पार्ट्स आपूर्ति करने वाले विक्रेता की देनदारियां बढ़ने के कारण आपूर्तिकर्ता नियमित रूप से डिपो को आपूर्ति नहीं दे रहे हैं। इससे बसों का समय पर उचित रखरखाव और मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है। इस कारण रूटों पर भेजी जा रही बसों के खराब होने के मामले बढ़ गए हैं। राजधानी शिमला और इसके आसपास के क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हिमाचल पथ परिवहन निगम के शिमला शहरी, ग्रामीण और तारादेवी डिपो की बसें खराब हो रही हैं।
मिली जानकारी के अनुसार शिमला प्रभाग को लंबे समय से बसों के लिए नाममात्र बैटरी की आपूर्ति मिली है, वहीं परवाणू में एचआरटीसी के टायर रीट्रेटिंग प्लांट को रबर की आपूर्ति भी नहीं मिल रही है। इस कारण डिपो को पुराने रीट्रेट किए टायर भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। वहीं, वर्कशॉप को कलपुर्जों की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर वर्कशॉप में मरम्मत के लिए आने वाली बसों पर पड़ रहा है, जिससे बसें खराब होने लगी हैं। लंबे समय तक यदि स्पेयर पार्ट्स, बैटरी और टायर की आपूर्ति नहीं मिली, तो आने वाले समय में डिपो की वर्कशॉप में बसों की मरम्मत का कार्य और आम लोगों की परेशानी बढ़ना तय है। परिवहन निगम के प्रभागीय वर्कशॉप तारादेवी के प्रबंधक तकनीकी अमित चौहान ने माना कि समस्या है मगर बसों की मरम्मत और रखरखाव के लिए बैटरी, स्पेयर पार्ट्स, नए टायर व रीट्रेटिड टायर उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यालय से मिली सूचना के अनुसार प्रभाग में नए टायर और बैटरी की आपूर्ति जल्द आ रही है, जिससे समस्या हल हो जाएगी।
नई इलेक्ट्रिक बसें के सहारे संभाला जा रहा मोर्चा
शिमला शहरी डिपो को मिली 15 और ग्रामीण डिपो को मिली 25 नई इलेक्ट्रिक बसों के आने से डिपो में स्पेयर पार्ट्स, टायर और कलपुर्जों की कमी होने पर भी निगम की बस सेवाओं पर असर कम नजर आ रहा है। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों पर अब इलेक्ट्रिक बसें ही दौड़ती नजर आने लगी हैं। पुरानी डीजल बसों को निगम के डिपो वर्कशॉप में एक बस की बैटरी दूसरे में डालकर और टायर बदल-बदलकर किसी तरह रूटों पर भेजने के लायक बनाया जा रहा है। रूट पर भेजने के बाद बड़ी तकनीकी खराबी आने पर बसें स्थायी रूप से खड़ी भी होने लगी हैं। परिवहन निगम को बस सेवाओं को नियमित रूप से जारी रखने और यात्रियों को बसों की खराबी से होने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान करना होगा। इसके लिए वर्कशॉप में जरूरत के अनुसार स्पेयर पार्ट्स, टायर और बैटरी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
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दो दिनों में शहर की मुख्य सड़कों पर ही खराब हुईं एचआरटीसी की चार बसें
8 अक्तूबर को सचिवालय के सामने करसोग डिपो की बस और प्रिंटिंग प्रेस के समीप मुख्य सड़क पर एचआरटीसी की बस खराब हुई तथा तवी मोड़ पर एचआरटीसी की एक और बस खराब हुई। 9 अक्तूबर को चक्कर के समीप एचआरटीसी की बस का टायर ही फट गया। 5 अक्तूबर को कच्ची घाटी में एचआरटीसी की बस खराब हो गई। इन बसों के खराब होने से जाम भी लगे, जिससे आम जनता और इन बसों में सवार यात्री परेशान हुए।
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-बसों की समय से नहीं हो पा रही मरम्मत, विक्रेता की देनदारियों का भुगतान नहीं कर पा रहा एचआरटीसी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम की पुरानी डीजल बसें मरम्मत के अभाव में सड़कों पर जगह-जगह हांफने लगी हैं। राजधानी शिमला की सड़कों पर ही औसतन हर रोज एचआरटीसी की बसें खराब हो रही हैं। इससे शहर का ट्रैफिक प्रभावित होने के साथ ही एचआरटीसी की बसों में सफर करने वाले यात्रियों को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बसों के जगह-जगह हांफने की मुख्य वजह डिपो को जरूरत के हिसाब से नई बैटरी, कलपुर्जे और टायर उपलब्ध न होना है। स्पेयर पार्ट्स आपूर्ति करने वाले विक्रेता की देनदारियां बढ़ने के कारण आपूर्तिकर्ता नियमित रूप से डिपो को आपूर्ति नहीं दे रहे हैं। इससे बसों का समय पर उचित रखरखाव और मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है। इस कारण रूटों पर भेजी जा रही बसों के खराब होने के मामले बढ़ गए हैं। राजधानी शिमला और इसके आसपास के क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हिमाचल पथ परिवहन निगम के शिमला शहरी, ग्रामीण और तारादेवी डिपो की बसें खराब हो रही हैं।
मिली जानकारी के अनुसार शिमला प्रभाग को लंबे समय से बसों के लिए नाममात्र बैटरी की आपूर्ति मिली है, वहीं परवाणू में एचआरटीसी के टायर रीट्रेटिंग प्लांट को रबर की आपूर्ति भी नहीं मिल रही है। इस कारण डिपो को पुराने रीट्रेट किए टायर भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। वहीं, वर्कशॉप को कलपुर्जों की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर वर्कशॉप में मरम्मत के लिए आने वाली बसों पर पड़ रहा है, जिससे बसें खराब होने लगी हैं। लंबे समय तक यदि स्पेयर पार्ट्स, बैटरी और टायर की आपूर्ति नहीं मिली, तो आने वाले समय में डिपो की वर्कशॉप में बसों की मरम्मत का कार्य और आम लोगों की परेशानी बढ़ना तय है। परिवहन निगम के प्रभागीय वर्कशॉप तारादेवी के प्रबंधक तकनीकी अमित चौहान ने माना कि समस्या है मगर बसों की मरम्मत और रखरखाव के लिए बैटरी, स्पेयर पार्ट्स, नए टायर व रीट्रेटिड टायर उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यालय से मिली सूचना के अनुसार प्रभाग में नए टायर और बैटरी की आपूर्ति जल्द आ रही है, जिससे समस्या हल हो जाएगी।
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नई इलेक्ट्रिक बसें के सहारे संभाला जा रहा मोर्चा
शिमला शहरी डिपो को मिली 15 और ग्रामीण डिपो को मिली 25 नई इलेक्ट्रिक बसों के आने से डिपो में स्पेयर पार्ट्स, टायर और कलपुर्जों की कमी होने पर भी निगम की बस सेवाओं पर असर कम नजर आ रहा है। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों पर अब इलेक्ट्रिक बसें ही दौड़ती नजर आने लगी हैं। पुरानी डीजल बसों को निगम के डिपो वर्कशॉप में एक बस की बैटरी दूसरे में डालकर और टायर बदल-बदलकर किसी तरह रूटों पर भेजने के लायक बनाया जा रहा है। रूट पर भेजने के बाद बड़ी तकनीकी खराबी आने पर बसें स्थायी रूप से खड़ी भी होने लगी हैं। परिवहन निगम को बस सेवाओं को नियमित रूप से जारी रखने और यात्रियों को बसों की खराबी से होने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान करना होगा। इसके लिए वर्कशॉप में जरूरत के अनुसार स्पेयर पार्ट्स, टायर और बैटरी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
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दो दिनों में शहर की मुख्य सड़कों पर ही खराब हुईं एचआरटीसी की चार बसें
8 अक्तूबर को सचिवालय के सामने करसोग डिपो की बस और प्रिंटिंग प्रेस के समीप मुख्य सड़क पर एचआरटीसी की बस खराब हुई तथा तवी मोड़ पर एचआरटीसी की एक और बस खराब हुई। 9 अक्तूबर को चक्कर के समीप एचआरटीसी की बस का टायर ही फट गया। 5 अक्तूबर को कच्ची घाटी में एचआरटीसी की बस खराब हो गई। इन बसों के खराब होने से जाम भी लगे, जिससे आम जनता और इन बसों में सवार यात्री परेशान हुए।