आवश्यकता आविष्कार की जननी है, इसे सच कर दिखाया है ग्रेजुएट बागवान दीपक ठाकुर ने। हिमाचल के कुल्लू जिले के आनी ब्लॉक की शिल्ली पंचायत के दीपक (40) ने एक किलोमीटर ऊंची चोटी पर गांव के लिए सड़क की कोई उम्मीद न देख रोपवे बनाने की ठानी।
निजी कंपनियों से बात की तो एक करोड़ से कम में कोई भी रोपवे बनाने को तैयार नहीं हुई। ऐसे में खुद ही डिजाइन तैयार कर 11 लाख रुपये से 40 ट्रॉली वाला रोपवे तैयार कर दिया। ये इलेक्ट्रिक मोटर और गियर बॉक्स से चलता है। हालांकि, अभी इसमें दो ही ट्रॉली रखी गई हैं।
आधुनिक तकनीक से लैस यह रोपवे सालों से एक बार भी नहीं रुका और ईश्वर की अनुकंपा से न ही यहां कोई हादसा हुआ। दो क्विंटल क्षमता वाली ट्रॉलियों में खास किस्म की वायर और रबड़ का इस्तेमाल किया गया है। ये बरसों बरस तक खराब नहीं होंगी। ट्रॉली में सेब की पेटियों के अलावा आदमी भी आसानी से आ और जा सकते हैं।
दीपक ठाकुर को सेब ढोने के लिए खेत में गाड़ी की जरूरत पड़ी तो चार क्विंटल क्षमता वाली मोटर बना डाली। इसके लिए 25 हजार रुपये का इंजन, 12 हजार रुपये में कबाड़ खरीदा। 40 हजार से मोटर दो लीटर पेट्रोल से पूरा दिन काम करती है। वे जिस इंजन का इस्तेमाल करते हैं, उसकी कैपेसिटी को सात गुना बढ़ा देते हैं।
दीपक के मुताबिक सेब की रूट स्टॉक किस्मों को लगाने के लिए खुदाई की जरूरत पड़ी तो एक खास किस्म की जेसीबी बना दी। इससे जमीन में बड़ी-बड़ी चट्टानें उखाड़ दीं।