देखें, कैसे पाक के बरकी शहर तक पहुंची थी भारतीय फौज
1965 में भारतीय सेना ने किस तरह पाकिस्तान के छक्का छुड़ाए थे इसकी लाइव स्टोरी आज हम आपको बताएंगे। हिमाचल के मंडी जिले के गांव कैहनवाल के रहने वाले पूर्ण सिंह गुलेरिया ने ये फोटो उस वक्त लिए हैं। वे भारतीय सेना से हवलदार के पद से रिटायर हुए हैं। पूर्ण सिंह रेंज फिक्स करने के बाद टैंक से दुश्मन पर गोला दागते थे। रेड सर्कल में टैंक पर तैनात पूर्ण सिंह। सभी फोटो: हवलदार पूर्ण सिंह (रिटायर)
देखें, कैसे पाक के बरकी शहर तक पहुंची थी भारतीय फौज
कहते हैं भारतीय सेना पाक की जमीन तक पहुंच गई थी। बरकी शहर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 70 टैंक कब्जे में ले लिए। बुजदिल थे पाक सैनिक। टैंक छोड़कर ही भाग गए। पाक सेना खेमकरण से भारत की सीमा में घुसी थी। इन सभी टैंकों को बाद में अमृतसर के बिखीविंड जगह पर लाया गया। आज बिखीविंड पंजाब के तरनतारन जिले में है। ये टैंक बाद में भी पाक को वापस नहीं किए गए। इन्हें भारत के अलग अलग शहरों में रखा गया है। इनमें से तीन टैंक तो हिमाचल के धर्मशाला, कांगड़ा में रखे गए हैं।
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बरकी से लाहौर करीब पांच किलोमीटर था। रास्ते में एक इच्छोगिल नहर पड़ती थी। इस नहर पर पुल था जिससे सेना ने लाहौर पहुंचना था। पाक को पता चल गया था कि अब हमारी खैर नहीं। पाक सेना ने इस पुल को माइंस से उड़ा दिया। यही नहीं सेना के जवान तैरकर न आ जाएं उन्होंने नहर में करंट छोड़ दिया।
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जैसे ही कुछ जवान पानी में उतरे तो करंट से उनकी मौत हो गई। उस वक्त फौज को कर्नल जोशी हेड कर रहे थे। वे नहर किनारे रेकी को निकले। पाक सेना ने नहर किनारे भी माइंस लगा रखी थी। जैसे ही जीप माइंस पर चढ़ी जीप के परखच्चे उड़ गए। कर्नल जोशी के टुकड़े टुकड़े हो गए।
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बरकी में पाक पुलिस की चौकी थी और ग्राउंड भी। तत्कालीन देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पंजाब के सीएम प्रतात सिंह कैरों पाक की जमीन यानी बरकी पहुंचे। पूर्ण सिंह कहते हैं कि प्रधानमंत्री जी को देखकर सभी जवानों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।