छोटी काशी मंडी में होली का पर्व खूब हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सेरी मंच पर सुबह से ही होली का रंगीन नजारा देखने को मिला। डीजे की धुनों पर शहर के लोगों ने जमकर मस्ती की। बाद में रियासत कालीन देवता माधोराय की पालकी के साथ होली खेली।
होली का जश्न मनाने के लिए सेरी में पूरा शहर उमड़ पड़ा था। पहाड़ी गीतों और होली के गानों पर युवाओं ने जमकर डांस किया। राजदेवता माधोराय भी पालकी में सवार होकर होली के मतवालों के साथ होली खेलने सड़कों पर उतर आए। माधोराय की जलेब निकलने के बाद ही मंडी में होली की मस्ती समाप्त हो गई।
होली का त्योहार मंडी जनपद में देश भर में मनाई जाने वाली होली से एक दिन पूर्व ही मनाया जाता है। सुबह से ही युवाओं की टोलियां सड़कों पर निकल कर एक दूसरे पर रंग गुलाल फेंकते हुए सेरी चानणी की ओर बढ़ने लगीं। इसके अलावा शहर के मुख्य बाजारों में भी अबीर गुलाल की बौछार जमकर हुई।
शहर के ऐतिहासिक सेरी मंच पर 11 बजे से डीजे पर मस्ती में शुरू हो गई। हजारों लोगों ने जमकर गुलाल उड़ाया और डांस किया। युवाओं में खासा उत्साह था। दोपहर 2 बजे राजदेवता माधोराय की पालकी दरबार से निकली।
लोगों ने माधोराय के संग होली खेली। राज दरबार से चौहाटा, समखेतर, भूतनाथ होते हुए देव माधोराय की पालकी वापस मंदिर पहुंची। होली में रियासत काल से ही राजदेवता माधोराय की भागीदारी रही है। देर शाम कांभल वृक्ष की टहनियों की पूजा कर उसका होलिका दहन किया गया।