दुरूह भौगोलिक परिस्थितियां और ऑक्सीजन की कमी के बीच लंबा सफर। इन तमाम चुनौतियों को लांघ फूलती सांस के साथ सैलानी यहां पहुंचने पर सफर की दुश्वारियों और थकान को भूल जाते हैं। दुनिया के इस सबसे ऊंचाई पर स्थित कहे जाने वाले रेस्तरां पर आर्गेनिक फूड का स्वाद सैलानियों को कभी न भूलने वाला अहसास देता है।
हिमाचल प्रदेश की जनजातीय स्पीति घाटी में समुद्र तल से 15,137 फीट की ऊंचाई पर स्थित कौमिक गांव का यह रेस्तरां एडवेंचर प्रेमियों को हजारों मील दूर से खींच लाता है। आर्गेनिक फूड और मेहमाननवाजी में आत्मीयता के मुरीद सैलानी यहां बार-बार आने की ख्वाहिश लेकर लौटते हैं।
दरअसल, यह रेस्तरां हर साल अप्रैल से सितंबर माह तक खुला रहता है। सर्दियों में बर्फबारी के कारण सैलानियों का कौमिक गांव तक पहुंचना संभव नहीं होता। दुनिया भर के सैलानी आर्गेनिक फूड और छरमा की एक कप चाय की चुस्की के लिए ऑक्सीजन की चुनौती भी स्वीकारने को तैयार हो रहे हैं। अत्यधिक ऊंचाई होने की वजह से यहां पर सांस लेने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं होती। ऐसे में हाई अल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा अलग से रहता है। बावजूद इसके विदेशी और देशी पर्यटकों का इस रेस्तरां में आर्गेनिक फूड के लिए तांता लगा रहता है।
स्पीति मुख्यालय काजा के ठीक ऊपर चीन सीमा से सटे बसे कौमिक गांव तक पहुंचने के लिए पहाड़ काटकर बनाए गए मुश्किल रास्ते से सफर करना पड़ता है। वाहनों के खींचने की क्षमता भी घट जाती है। हालांकि एहतियात के तौर पर हाई एल्टीट्यूड सिकनेस से बचने के लिए प्रशासन ने सैलानियों को फर्स्ट एड बॉक्स साथ ले जाने की विशेष एडवाजरी जारी की है। पिछले दो सालों से कौमिक में रेस्तरां चला रहे दो भाई नावांग और सोनम ने बताया कि रेस्तरां में सैलानियों को क्यू लोकल पास्ता, सेंडविच, थेंथुक के अलावा करीब जड़ी-बूटियों के दस प्रकार पेय उपलब्ध हैं।
इंटरनेट पर देखा तो फ्रांस से खिंचे चले आए- फ्रांस से कौमिक पहुंचे पर्यटक सेम्यूल और इवान ने बताया कि रेस्तरां के बारे में उन्होंने इंटरनेट से जानकारी हासिल की। वे दुनिया के सबसे ऊंचे रेस्तरां में चाय की चुस्की लेने से खुद को रोक नहीं पाए। बंगलूरू के कविता और साहिल किदवई इस रेस्तरां को बेहद खास मानते हैं।