हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी में विकास को नए आयाम देने वाले भव्य दिव्य शिव धाम में मंडी कलम चित्रशैली और काष्ठकुणी शैली की झलक भी दिखेगी। इन प्राचीन कलाओं के साथ धाम के दोनों मुख्य द्वार तैयार किए जाएंगे। शिवधाम में प्रवेश के लिए तैयार हो रहे कैलाश द्वार में भी इसकी झलक देखने को मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से देश-दुनिया में मंडी धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा। दुनिया भर के पर्यटकों के लिए मंडी में पर्यटन गंतव्य का नया स्वरूप देखने को मिलेगा।
हिमाचल: भव्य दिव्य शिव धाम मंडी में दिखेगी काष्ठकुणी शैली की झलक, नौ हेक्टेयर में हो रहा निर्माण, देखें तस्वीरें
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मंडी कलम चित्रशैली
मंडी कलम चित्रशैली के रूप में एक लोककला है, जो रियासतकाल में फली-फूली। यह पहाड़ी चित्रकला प्राकृतिक रंगों से अपने चित्रण की बारीकियों के लिए मशहूर रही है। इसमें गणेश, सूर्य, पांडवों, दुर्गा, काली जैसे धार्मिक चरित्रों के अलावा सैनिक, यमराज, नारी, जलकुंभ आदि का चित्रण किया गया है। यह कला जनमानस के हाथों संवरी और कुशल चितेरों के संरक्षण में बढ़ी है। गृहिणियों की ओर से घर के आंगन में लिखणू और डहर के रूप में तथा पंडितों और विद्वानों की जन्मपत्रियों, धार्मिक और तांत्रिक पुस्तकों, पांडुलिपियों से लेकर आदमकद तस्वीरों, भीति चित्रों को बारीकी से उकेरा है।
काष्ठकुणी शैली
काष्ठकुणी शैली के मकान, भवन, मुख्य द्वारों के निर्माण की प्राचीन कला है। इसमें अधिकतर लकड़ी का इस्तेमाल होता है। उस पर नक्काशी भी की जाती है। इस शैली के निर्माण में सीमेंट का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं किया जाता है। दीवारों पर मिट्टी और गोबर के मिश्रण से बने पदार्थ का पलस्तर किया जाता है। साथ में लकड़ी इस्तेमाल की जाती है।
शिव धाम से विकास को नए आयाम
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट शिवधाम का 27 फरवरी, 2021 को मंडी में शिलान्यास किया था। मंडी में शिव धाम से विकास को नए आयाम मिलेंगे। लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। शिवधाम को रोपवे और उड़ान के तहत हवाई सेवाओं से भी जोड़ा जा रहा है।
भव्य दिव्य शिव धाम, बेजोड़ होगा स्वरूप
उपायुक्त अरिंदम चौधरी और पर्यटन विभाग मंडी के उपनिदेशक एसके पराशर ने बताया कि शिवधाम में प्रवेश के लिए कैलाश द्वार होगा। यहां भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी। गंगा कुंड होगा, शिव वंदना के नाम से ओरिएंटेशन सेंटर होगा। रुद्रा मंडल और डमरू मंडल होगा। यहां भगवान शिव के डमरू के दर्शन और डमरू मंडल के पास खाने-पीने की वस्तुएं मिलेंगी। मानसरोवर कुंड, मोक्ष पथ, बिल्वपत्र कुंड, शिवस्मृति म्यूजियम तथा एक बड़ा शिवलिंग स्थापित होगा। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी करवाए जाएंगे। माता पार्वती, कार्तिकेय और गणेश भगवान की प्रतिमाएं भी होंगी। हर्बल गार्डन, नक्षत्र वाटिका, एमफी थियेटर होगा और सैकड़ों गाड़ियों के लिए पार्किंग सुविधा होगी।