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यहां स्नान नहीं किया तो अधूरी रहती है चार धाम की यात्रा

Tue, 14 Apr 2015 10:38 PM IST
Updated Tue, 14 Apr 2015 10:38 PM IST
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यहां स्नान नहीं किया तो अधूरी रहती है चार धाम की यात्रा

Maharishi Markandeya temple in Bilaspur.

हिमाचल के बिलासपुर जिले में महर्षि मार्कंडेय की तपोस्थली मार्कंड में स्नान किए बिना चार धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है। किंवदंतियों के अनुसार यहां शिव भगवान प्रकट हुए थे और यहां झरना फूट पड़ा। पढ़िए पूरी कहानी। इनपुट: संजय भारद्वाज, राजकुमार सेन, गोपाल शर्मा

यहां स्नान नहीं किया तो अधूरी रहती है चार धाम की यात्रा

Maharishi Markandeya temple in Bilaspur.

इसी झरने में स्नान किया जाता है। स्नान के बाद ही चार धाम की यात्रा को पूर्ण माना जाता है। बैसाखी के पर्व पर यहां काफी संख्या में लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं। मंगलवार को भी श्रद्धालुओं का खूब तांता लगा। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का सिलसिला आरंभ हो जाता है।

यहां स्नान नहीं किया तो अधूरी रहती है चार धाम की यात्रा

Maharishi Markandeya temple in Bilaspur.

पौराणिक कथा के अनुसार मृकंडु ऋषि की घोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें पुत्र रतन का वरदान दिया। वरदान के साथ उन्होंने पुत्र के अल्पायु होने का भी जिक्र किया। इससे पिता मृकंडु चिंताग्रस्त रहने लगे। बालक मार्कंडेय कुशाग्र बुद्धि होने के साथ-साथ पितृभक्त भी थे।

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यहां स्नान नहीं किया तो अधूरी रहती है चार धाम की यात्रा

Maharishi Markandeya temple in Bilaspur.

उन्होंने अपने पिता के मन को कुरेद कर चिंता का कारण जान लिया। चिंता से मुक्ति के लिए भगवान शिव की तपस्या की। जब उनकी आयु 12 वर्ष होने में केवल तीन दिन शेष रह गए, तो उन्होंने रेत का शिवलिंग बनाया और शिव की तपस्या में लीन हो गए। यमदूत उनके प्राण हरण करने के लिए आए, लेकिन जब वह बाल तपस्वी की ओर बढ़ने लगे तो रेत के शिवलिंग में से आग की लपटें निकलीं।

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Maharishi Markandeya temple in Bilaspur.

हारकर यमदूत चले गए तथा यमराज को सारा हाल सुनाया। स्वयं यमराज जब वहां आए तो मार्कंडेय जी ने शिवलिंग को बांहों में पकड़ लिया। शिवलिंग में से शिव प्रकट हुए तथा उन्होंने यमराज को वापस यमपुरी जाने का आदेश दिया। ऐसा मानना है कि यह घटना बैसाखी की पूर्व संध्या को घटित हुई।

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