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भारत के लिए पहला मेडल जीतने वाली बेटी के संघर्ष को जानकर कुछ करने की ठान लेंगे

Sun, 14 Jan 2018 01:18 PM IST
मनु शर्मा/संजय ठाकुर, अमर उजाला, मनाली/पतलीकूहल
मनु शर्मा/संजय ठाकुर, अमर उजाला, मनाली/पतलीकूहल Updated Sun, 14 Jan 2018 01:18 PM IST
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international skiing champion aanchal thakur struggle story

खून जमा देने वाली ठंड, दस फीट बर्फ और घर से सोलंगनाला की पांच किलोमीटर लंबी दूरी। एफआईएस विंटर गेम्स में देश के लिए पहला कांस्य पदक जीतने वाली आंचल ठाकुर बरसों ऐसे हालात से जूझती प्रैक्टिस करने पहुंचती थी।

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बचपन में पिता की अंगुली पकड़े आंचल ने इन पहाड़ सरीखी चुनौतियों को रूटीन का हिस्सा बनाकर पार किया। यही नहीं, सोलंगनाला में बर्फ पिघल जाती तो तीन किलोमीटर चढ़ाई चढ़कर आंचल फातरू में प्रैक्टिस करने पहुंच जाती।

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बरसों की इस जद्दोजहद के बाद आंचल जब पदक के साथ घर लौटी तो उसके जेहन में संघर्ष का पूरा दौर फिर ताजा हो गया।

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अमर उजाला से विशेष बातचीत में आंचल ठाकुर ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे माता-पिता की कड़ी मेहनत है।

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आंचल ने कहा कि उनके पिता ने विशेष स्कीइंग ट्रेनिंग के लिए मुश्किल से पैसों का बंदोबस्त कर उन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजा था।

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