अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले के लिए पधारे 188 देवी-देवता सोमवार को मंडी के पड्डल मैदान में भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान हो गए। इसी के साथ ऐतिहासिक पड्डल मैदान पूरी तरह से देवलोक में तब्दील हो गया। मैदान पर अधिकांश देवी-देवताओं ने अपने परंपरागत स्थानों पर ही आसन ग्रहण किया है। जबकि, कुछ देवी-देवताओं ने पड्डल मैदान की पौड़ियों पर अपना स्थान ग्रहण किया है। देवी-देवताओं के दर्शन के लिए सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने पड्डल मैदान पहुंचकर शीश नवाया। देवी-देवताओं ने भी उन्हें दर्शन दिए और उनके कष्टों का भी निवारण किया।
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेला: ऐतिहासिक पड्डल मैदान देवलोक में हुआ तब्दील, हजारों श्रद्धालुओं ने नवाया शीश
सर्व देवता सेवा समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा ने कहा कि कॉलेज मैदान में भवन निर्माण के चलते इस बार देवी-देवताओं के लिए पड्डल मैदान में बैठने की जगह बनाई गई है।
प्रशासन की पहल को सराहा
महाशिवरात्रि मेले में आए देवी-देवता इस बार पड्डल मैदान पर अपने रथों, देवलुओं और गूर व पुजारी के साथ विराजमान हुए हैं। मैदान क्षेत्र में सभी देवी-देवताओं के दर्शन श्रद्धालुओं को हो रहे हैं। प्रशासन की इस पहल को देव समितियों ने सराहा है। देवता के कारदारों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें इस बार मैदान पर एक साथ बैठाया गया है। इस व्यवस्था को आगे भी कायम रखा जाए।
कारदार, पुजारी बोले, बारिश से बचने का भी हो प्रबंध
माता मेहणी के पुजारी यादवेंद्र सिंह, काली चामुंडा के सचिव बीरी सिंह, महाकाली पुरानी मंडी के कारदार सुनील सहित अन्य देवताओं के कारदारों ने प्रशासन के प्रबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशासन देवताओं के बैठने के लिए अस्थायी शेड बना देता तो अच्छा होता। बारिश के पानी से बचने के लिए हर बार देवताओं के रथों को उठा कर सुरक्षित जगह आश्रय लेना पड़ता है। कहा कि जिस तरह कुल्लू दशहरा में देवताओं के लिए मेला मैदान में अस्थाई शेड बनाए जाते हैं उसी तरह मंडी में भी शेड बना कर देवताओं को बिठाया जाए। ताकि, बारिश होने पर देव रथ सुरक्षित रहें और देवलू भी आसानी से बैठे रहें।
देवलू नाटी और वाद्य यंत्र स्पर्धा के लिए पंजीकरण शुरू
वहीं, महाशिवरात्रि महोत्सव में देवलू नाटी और वाद्य यंत्र स्पर्धा के लिए पंजीकरण की पंजीकरण की संस्कृति सदन कांगणीधार में प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई। पहले दिन देवलू नाटी के लिए 57 दलों और वाद्य यंत्र स्पर्धा के लिए 16 बंजतरी दलों ने पंजीकरण कराया। मंगलवार दोपहर 12 बजे से पहले तक पंजीकरण होगा।