यहां पार्किंग के नाम पर पर्यटकों से हो रही लूट-खसोट और मनमानी, देखिए तस्वीरें
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टाइम पूछा नहीं, बस पर्ची थमा दी
दिन: रविवार, दोपहर 1:33 मिनट। अपनी टैक्सी में एक परिवार को शिमला लाए पंजाब के विपिन कुमार ने बताया कि पार्किंग में बिना टाइम पूछे ही उन्हें 94 रुपये की पर्ची थमा दी और 100 रुपये ले लिए। वह दो-तीन घंटे के लिए यहां गाड़ी पार्क कर रहे थे। उनसे सिर्फ इतना पूछा गया कि आज वापस जाना है या कल। आज वापसी कहने पर आठ घंटे की पर्ची कट गई। कहा कि उन्हें मालूम नहीं था कि दो या चार घंटे की कम पर्ची कटती है। पार्किंग में लिस्ट भी नहीं दिख रही जिसमें फीस का पता चल सके।
एक घंटे के 100 रुपये, बकाया भी वापस नहीं
समय दोपहर 1:50 मिनट। यमुनानगर से दोस्तों के साथ कार में शिमला घूमने आए जसवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने एक घंटे के लिए पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी की थी। इसके बदले उनसे 100 रुपये फीस ली। रसीद देखी तो इसमें 0-8 घंटे तक के लिए 94 रुपये लिखे थे। हमने कहा भी कि एक घंटे के लिए ही गाड़ी पार्क करेंगे। लेकिन कर्मचारी ने आठ घंटे वाली रसीद थमा दी। बकाया भी वापस नहीं किया।
ऐसे चल रहा लूट का खेल
पार्किंग में लूट का खेल इस तरह से चल रहा है कि खुद सैलानियों तक को इसका पता नहीं चलता। दोपहर बाद आने वाले सैलानियों से टाइम की जगह सिर्फ यह पूछा जाता है कि आज वापसी करनी है या कल। जिन्हें उसी दिन वापसी करनी है, उन्हें 94 रुपये जबकि अगले दिन वापसी करने वालों को 177 रुपये की रसीद दी जाती है। अब एक घंटे की पार्किंग के लिए भी आठ घंटे के पैसे वसूले जा रहे हैं। सैलानी समझते हैं कि एक से लेकर आठ घंटे तक की रेट लिस्ट एक जैसी है। जबकि 0-2 घंटे की पार्किंग के 35, 2-4 घंटे के 59 रुपये शुल्क बनता है। सिर्फ लोकल गाड़ियों की ही यह रसीद कटती है।
बकाया न देकर कमा रहे हजारों
रसीद काटने के बाद सैलानियों को बकाया भी वापस नहीं किया जा रहा। यदि किसी सैलानी की 94 रुपये की रसीद कटती है तो बाकी छह रुपये वापस नहीं होते। पूछने पर खुले पैसे न होने का बहाना। वीकेंड पर इस पार्किंग में करीब 300 गाड़ियां पार्क होती हैं। बकाया वापस न होने की स्थिति में 1800 रुपये कर्मचारियों की जेबों में जा रहे हैं।