जानिए बीएससी टॉपर्स की सफलता का राज और इनके अरमान
आईएएस बनकर लोगों की सेवा करना चाहता है अभिनव- बिलासपुर। गुदड़ी का लाल चमक गया है। शिवा कॉलेज में स्टोर कीपर की नौकरी करने वाले मस्त राम के बेटे अभिनव ने बीएससी फाइनल की परीक्षा में 90.6 फीसदी अंकों के साथ पहला स्थान हासिल कर न केवल अपने माता-पिता और शिक्षकों बल्कि पूरे जिला का नाम रोशन किया है। पीजी कॉलेज बिलासपुर के डियारा सेक्टर निवासी अभिनव ने कहा कि वह आईएएस अफसर बनना चाहता है। अभिनव के पिता मस्तराम, गृहिणी माता लता देवी, और एमटैक कर रहे बड़े भाई ने बताया के अभि की कामयाबी ये वह बेहद खुश है। गौरतलब है कि अभिनव इन दिनों बंगलुरू में है। जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटेफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) में हुआ है। वह वहां पर केमिकल साइंस में रिसर्च कर रहे है। इसके साथ ही पीएचडी भी करेंगे। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस टेक्नॉलॉजी दिल्ली के माध्यम से सेंटर के लिए चयनित हुए अभिनव को सरकार की ओर से बाकायदा स्टाइपंड भी मिल रहा है।
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पीएचडी कर अध्यापक बनना चाहती है गोमती- घुमारवीं (बिलासपुर)। शिक्षा के हब के रूप में उभर कर सामने आए घुमारवीं उपमंडल के कुठेडा कस्बे के टीहरी गांव की गोमती ने हिमाचल प्रदेश विवि में बीएससी में दूसरा स्थान हासिल कर पूरे प्रदेश में घुमारवीं का नाम चमकाया है। गोमती देवी ने 2000 में से फाइनल में 1804 अंक हासिल किए हैं। गोमती का सपना रसायन विज्ञान में पीएचडी कर अध्यापन के क्षेत्र में जाने का है। तीन बहनों में सबसे छोटी गोमती ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। रोजाना दस घंटे की कड़ी मेहनत के बूते दूसरे स्थान पर जगह बनाने वाली गोमती के पिता रमेश कुमार एक दुकानदार और माता ब्रह्मी देवी एक गृहणी है।
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प्रोफेसर बनना चाहते हैं मंडी के गवेश- मंडी। वल्लभ कॉलेज मंडी के छात्र गवेश माधवी ने प्रदेश में तीसरा स्थान झटका है। गवेश माधवी कनैड के डुगराईं गांव से संबंध रखते हैं। गवेश माधवी प्रोफेसर बनना चाहते हैं। वर्तमान में गवेश ने प्रदेश विवि में एमएससी केमिस्ट्री के दाखिला लिया है। उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वह कॉलेज में प्रोफेसरों की ओर से पढ़ाई जाने वाली हर चीज को घर आकर पढ़ते थे। परीक्षा के दौरान दिन-रात मेहनत की है। गवेश की मां बिमला देवी गृहिणी हैं। पिता विजेंद्र कुमार कारपेंटर का काम करते हैं। गवेश वल्लभ कॉलेज में बीएससी के तीनों वर्ष टॉपर रह चुके हैं।
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वैज्ञानिक बनेंगी अर्पणा जरियाल- शिमला। सेंट बीड्स कॉलेज की छात्र अर्पणा जरयाल बीएससी फाइनल की मेरिट में चौथे स्थान पर रही हैं। उनके पिता भटियात चुनाव क्षेत्र के विधायक बिक्रम जरियाल और माता सपना जरयाल को बेटी पर गर्व है। अर्पणा का लक्ष्य एक सफल वैज्ञानिक बनना है। रोजाना घंटों तक पढ़ाई कर उसने यह मुकाम पाया है। ब्रिकम जरियाल ने बताया कि पांचवीं कक्षा से ही अर्पणा लगातार मेरिट में आती रही हैं। अर्पणा ने आईआईटी कानपुर, दिल्ली, चंडीगढ़ से एमएससी की प्रवेश परीक्षा दी थी। तीनों टेस्ट उन्होंने पास किए हैं। अर्पणा के शिक्षक डीबी पठानिया का कहना है कि अर्पणा एक बहुत ही मेहनती छात्रा हैं। उन्होंने सफलता पर अर्पणा को बधाई दी है।
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पांचवें नंबर पर ट्रक चालक की बेटी- हमीरपुर। मन में दृढ़ इच्छा शक्ति और कड़ी मेहनत के बल पर कठिन राह भी आसान हो जाती है। प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हमीरपुर जिले के बड़सर की नेहा शर्मा ने। बीएससी अंतिम वर्ष में राजकीय महाविद्यालय बड़सर की छात्रा नेहा शर्मा ने प्रदेश में पांचवां स्थान झटका है। नेहा के पिता रमेश चंद ट्रक चालक हैं। माता राजकुमारी गृहिणी हैं। नेहा ने बताया कि उन्होंने पहली बार मेरिट में स्थान पाया है। रोजाना आठ से दस घंटे पढ़ाई की है। अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। वह रसायन विज्ञान की कॉलेज प्रवक्ता बनेंगी।