हिमाचल के सेब का सिरका अब कई बीमारियों से निजात दिलाएगा। डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिकों ने पांच वर्षों के शोध के बाद यह सिरका तैयार किया है।
इसके सेवन से गठिया, अस्थमा, खांसी, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रोल जैसी बीमारियों से निजात मिलेगी। इस तकनीक से बाजार में न बिकने योग्य खराब क्वालिटी के सेब से भी सिरका तैयार किया जा सकेगा। इससे बागवानों की आर्थिकी भी सुधरेगी। सेब के इस सिरके की मांग देश भर में कई गुना बढ़ गई है।
शिमला जिले के जुब्बल की एक कंपनी हिली फूड्स ने विकसित सिरका बनाने की प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण को नौणी विश्वविद्यालय के साथ नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. वीके जोशी और डॉ. अंजू धीमान ने डीएसटी प्रायोजित परियोजना के तहत इस प्रौद्योगिकी को परंपरागत तरीकों की जगह पर एक प्रभावी विकल्प के रूप में विकसित किया है।
जुब्बल की कंपनी हिली फूड्स ने विश्वविद्यालय के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए और प्रौद्योगिकी शुल्क के रूप में 40 हजार रुपये का भुगतान किया। इस समझौते के तहत कंपनी सेब के सिरके का निर्माण और बिक्री के लिए विश्वविद्यालय की तकनीक इस्तेमाल करेगी। कंपनी के उत्पाद लेबल पर विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी का नाम लिखा जाएगा।