ग्रेट खली की रेसलिंग प्रतियोगिता का खर्च अब प्रदेश सरकार उठाएगी। नॉन शेड्यूल गेम के लिए 3.50 करोड़ जुटाने से सभी विभागों के हाथ खड़े होने पर यह फैसला लिया गया है। मंडी और सोलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर की रेसलिंग प्रतियोगिता के लिए बीते दिनों विभिन्न विभागों को बजट एकत्रित करने का जिम्मा सौंपा गया था। विभागीय अधिकारियों से पैसा एकत्र नहीं होने पर सरकार ने अब खुद प्रतियोगिता के लिए पैसा देने का फैसला लिया है। हालांकि प्रायोजकों की तलाश साथ में जारी रखी गई है।
डब्ल्यूडब्ल्यूई प्रतियोगिता मंडी में 29 जून और सोलन में सात जुलाई को होनी है। इसमें देश-विदेश के करीब 300 रेसलर भाग लेंगे। ग्रेट खली के सहयोग से प्रतियोगिता को आयोजित करवाया जा रहा है। प्रतियोगिता में विदेशी महिला रेसलर भी भाग लेंगी। कमेंटेटर भी विदेश से बुलाए जाएंगे। राजगढ़, मंडी और ऊना के ग्रेट खली से प्रशिक्षण ले रहे 12 रेसलर भी प्रतियोगिता मे भाग लेंगे।
इसके अलावा अभिनेता मनोज तिवारी, अभिनेत्री उर्वशी, राखी सावंत, पहाड़ी गायक दिलीप सिरमौरी इस दौरान रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। प्रतियोगिता के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ का खर्च प्रस्तावित है। खेल विभाग सीधे तौर पर नॉन शेड्यूल गेम के लिए पैसा जारी नहीं कर सकता है।
ऐसे में सरकार ने बीते दिनों ऊर्जा, पर्यटन, उद्योग और प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड को प्रतियोगिता के आयोजन के लिए प्रायोजक तलाशने का जिम्मा सौंपा था। लेकिन कोई भी विभाग प्रायोजक लाने में सफल नहीं हुआ। ऐसे में विधानसभा चुनाव के बाद प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा कर चुकी सरकार ने खुद ही पैसा देने का फैसला लिया है। सरकार प्रतियोगिता के लिए किस मद से पैसा जारी करती है, यह देखना दिलचस्प हो गया है। शेड्यूल खेलों की अनदेखी कर नॉन शेड्यूल खेल पर खर्चे जा रहे करोड़ों रुपये को लेकर आने वाले दिनों में सरकार की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
प्रदेश में शेड्यूल खेलों को तीन श्रेणियों ए, बी और सी में बांटा गया है। इन श्रेणियों के हिसाब से ही विभाग द्वारा पैसा जारी किया जाता है। शेड्यूल खेलों का ही ब्लाक, जिला और राज्य स्तर पर आयोजन होता है। शेड्यूल खेलों की सूची में शामिल नहीं किए गए खेलों के लिए विभाग सरकारी पैसा जारी नहीं कर सकता है।