प्रदेश की राजनीति में सीटों के लिहाज से दूसरे सबसे ताकतवर जिले में मोदी फेक्टर ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया है।
जिला मंडी में 10 सीटों में से 9 पर भाजपा जीती है और एक सीट जोगिंद्रनगर विस क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश राणा के नाम रही है। पिछले चुनाव में पांच सीटें कांग्रेस की झोली में डालकर सूबे की सत्ता निर्धारण में अहम भूमिका निभाने वाले बडे़ नेता यहां खाता तक नहीं खोल सके हैं। दो दिग्गज मंत्री और दो सीपीएस भी कांग्रेस की इज्जत बचाने में नाकाम रहे।
पांच बार लगातार द्रंग से जीत का परचम लहराने वाले स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर त्रिकोणीय मुकाबले में बगावत के बीच में हार गए हैं। आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी ने भी सीट गंवाई है। सीपीएस करसोग के मनसा और सुंदरनगर से सोहन लाल को भी हार का स्वाद चखना पड़ा है। सुखराम परिवार से सीएम को पंगा लेना महंगा पड़ गया।
मंडी सदर पर भी भाजपा ने कब्जा करके अपना जलवा दिखाया है। कांग्रेस को यहां पांच सीटों का नुकसान झेलना पड़ा है। भाजपा को जोगिंद्रनगर छोड़ चार सीटों पर नफा हुआ है। कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका मंडी और द्रंग में मिला है। 1967 से लेकर अब तक महज ढाई सालों (1990-93) तक सुखराम परिवार और कांग्रेस के कब्जे में रही सदर मंडी सीट अब सुखराम परिवार के साथ भाजपा की हुई है।
चुनावों से पहले मंत्री अनिल शर्मा ने अपने पिता और परिवार के साथ भाजपा का हाथ थामकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया था। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह द्रंग में बगावत के कारण हारे हैं। यहां सीएम के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व उपाध्यक्ष पीसीसी पूर्ण चंद ने खेल बिगाड़ा है। जबकि, उनकी बेटी चंपा ठाकुर को सुखराम परिवार के जनाधार के चलते हार का सामना करना पड़ा है।