हिमाचल में बारिश का कहर जारी है। नदियां नाले उफान पर हैं। जगह जगह लैंडस्लाइड होने से कई सड़कें बंद हैं। शिमला में बुधवार को ढली-मशोबरा सड़क पर भूस्खलन के कारण वाहनों की आवाजाही करीब पौना घंटा प्रभावित रही। भारी बारिश के कारण भूस्खलन के बाद सड़क में दलदल जमा हो गया। पानी और दलदल से सड़क लबालब भरी होने के कारण लोग पैदल भी सड़क पार नहीं कर पाए। इस दौरान जाम के कारण ढली से लेकर हिप्पा तक वाहनों की लंबी कतार लग गई।
मणिकर्ण घाटी का तुसनसेरी (गाडगी) प्राइमरी स्कूल मंगलवार रात को नाले में आई बाढ़ की चपेट में आने से धराशायी हो गया। बीती रात करीब दो बजे हुई मूसलाधार बारिश से नाला उफान पर था। इससे पूरी घाटी में अफरातफरी मच गई। घटना में करीब चार लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। बुधवार सुबह पंचायत प्रधान ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। सूचना मिलने पर स्थानीय पटवारी मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया।
नाले में आई बाढ़ से कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है। दो कमरों से इस एक मंजिला स्कूल भवन के साथ मिड-डे मील की रसोई भी बाढ़ की चपेट आ गई। धराशायी हुए स्कूल भवन की अलमारी में स्कूल का सारा रिकॉर्ड सुरक्षित पाया गया है। मणिकर्ण पंचायत के प्रधान देवा नंद ने बताया कि हादसा काफी भयानक था।
स्कूल के साथ बहने वाली गाडगी नाले में आई बाढ़ से स्कूल धराशायी हो गया। कहा कि हादसा रात के समय हुआ है। इन दिनों स्कूलों में अवकाश हैं। इधर, एसडीएम कुल्लू रोहित राठौर ने कहा कि प्रशासन को सूचना मिलते पटवारी को मौके पर भेजा गया है। प्रारंभिक आलकन में करीब चार लाख रुपये का नुकसान आंका गया है। गत साल बरसात में मणिकर्ण गुरुद्वारा सराय में गिरी चट्टानों से गाडगी चर्चा में आया था। तस्वीर में शिमला में ढली-मशोबरा सड़क पर हुआ भूस्खलन।
वहीं कुल्लू जिले में 24 घंटों के दौरान बारिश से करीब 50 लाख से अधिक नुकसान हुआ है। प्रशासन के प्रारंभिक आंकलन में करीब 50 लाख नुकसान बताया गया है। वहीं विस्तार से नुकसान का आंकलन करने में विभागीय टीमें जुटी हुई हैं। हालांकि फील्ड से रिपोर्ट मिलने पर नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है। प्रारंभिक नुकसान की सूचना में अकेले लोक निर्माण विभाग को ही 40 लाख रुपये की चपत लगी है।