ऐसी मजबूरी जिसके लिए 21 दिन बस पानी पीकर जीए राज्यपाल
हिमाचल के राज्यपाल डा. देवव्रत आचार्य के जीवन में ऐसा मोड़ भी आया था जब 21 दिन तक वे सिर्फ पानी पीकर ही जीते रहे। खुद राज्यपाल ने इसकी वजह बताई। आइए जानते हैं...
ऐसी मजबूरी जिसके लिए 21 दिन बस पानी पीकर जीए राज्यपाल
राज्यपाल डा. देवव्रत आचार्य ने 21 दिन तक केवल पानी पीया। उनका
कहना है कि मौत के मुंह से वे प्राकृतिक चिकित्सा से ही निकले हैं।
राज्यपाल कहते हैं कि 1989 में उनकी मौत की घोषणा कर दी गई थी।
ऐसी मजबूरी जिसके लिए 21 दिन बस पानी पीकर जीए राज्यपाल
एम्स,
अपोलो तक ने यह कर दिया था। मगर इसके बावजूद वे सबके बीच में हैं। ‘अमर
उजाला’ ने राज्यपाल डा. देवव्रत आचार्य से बाद में इस आपबीती पर प्रकाश
डालने को कहा तो उन्होंने अपनी पुस्तक ‘स्वास्थ्य का अनमोल मार्ग प्राकृतिक
चिकित्सा’ में इसका विस्तृत उल्लेख होने की बात की।
ऐसी मजबूरी जिसके लिए 21 दिन बस पानी पीकर जीए राज्यपाल
इस पुस्तक में
राज्यपाल डा. देवव्रत आचार्य ने लिखा है कि वे अपने गुरुकुल में अन्न
संग्रह के लिए गांव-गांव घूम रहे थे। हल्का सा बुखार हो गया था। इसकी परवाह
किए बगैर वे एलोपैथिक दवाइयां खाते रहे। निरंतर परिश्रम और विश्राम की
उपेक्षा से उन्हें टायफायड हो गया। टायफायड बिगड़ जाने के कारण अल्सरेटिव
कोलाइटिस ने उन्हें गिरफ्त में ले लिया।
ऐसी मजबूरी जिसके लिए 21 दिन बस पानी पीकर जीए राज्यपाल
चंडीगढ़ में महीनों इलाज
चलता रहा, मगर कोई परिणाम न देखकर उनके शुभचिंतक मित्रों ने एम्स दिल्ली
में उनका इलाज शुरू कर दिया। लंबे इलाज के बावजूद स्थिति सुधरने के बजाय
बिगड़ती ही गई। दिन में तीस-तीस बार शौचालय जाना पड़ता। शौच के रास्ते खून
आता रहा, जो महीनों चलता रहा। अंत में चिकित्सकों ने शल्य चिकित्सा की सलाह
दी, जिसके तहत बड़ी आंत को काटकर बाहर निकाला जाना था।