कहावत है कि कुत्ता वफादार होता है। आवश्यकता पड़ने पर कुत्ता इंसान से ज्यादा मददगार हो सकता है। ऐसी ही वफादारी एक कुत्ते ने हिमाचल के कुल्लू की चंद्रखणी की पहाड़ियों में बर्फ के बीच फंसे पंजाब के लौंगावाल इंजीनियरिंग कॉलेज के आठ में से दो छात्रों के साथ निभाई।
बर्फ में फंसे इंजीनियरिंग छात्रों के लिए संकटमोचक बना वफादार कुत्ता
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कुत्ते ने अपने शरीर की गरमाहट से दोनों छात्रों को नई जिंदगी दी। यह कुत्ता बिजली महादेव से उनके साथ था। कुत्ते की बदकिस्मती रही कि बचाव दल रेस्क्यू के वक्त उसे नहीं पकड़ पाया। 89 घंटे बाद चंद्रखणी से दोनों छात्रों को निकाल लिया गया। दोनों छात्र अन्य छह छात्रों से 11 मार्च को बिछड़ गए थे।
दोनों अन्य छात्रों को रेस्क्यू करवाने के लिए रास्ता ढूंढ रहे थे, लेकिन खुद ही रास्ता भटक गए। चार दिन छह साथियों से अलग रहे। शिमला निवासी हितेंद्र ने कहा कि कुत्ता भगवान के रूप में उनके साथ चार दिन तक रहा। दुख तब हुआ, जब उन्हें रेस्क्यू करते समय कुत्ता चंद्रखणी में ही रहा।
दोनों छात्र अनिल और हितेंद्र ने कहा कि आठ से दस मार्च तक वे दोनों अपने छह साथियों के साथ रहे। आठ साथियों में से सौरभ की तबीयत बिगड़ी। उन्होंने रास्ता ढूंढने और रेस्क्यू की तलाश करने को कदम आगे बढ़ाए और चार फुट बर्फ में फंस गए। नौ मार्च को खाना खत्म हो गया था। इसके बाद 10 से 14 मार्च तक उन्होंने बर्फ का पानी ही पिया। वे इतने दिन गुफा में रहे।
बर्फ अधिक देखकर उन्होंने अपनी जिंदगी भगवान भरोसे छोड़ी थी। कहते हैं कि कुत्ते ने उन्हें नई जिंदगी दी है। जब ठंड होती थी तो कुत्ते के शरीर की गरमाहट से हाथ-पांव सेंकते रहे। रविवार को हेलीकॉप्टर से दोनों छात्रों को खाना तो फेंका गया था, लेकिन तेज बर्फीली हवाओं के कारण इन तक खाना नहीं पहुंच पाया।