घर बैठे पार्ट टाइम जॉब के नाम पर लाखों कमाने का दावा करने वाली निजी कंपनी इंडिया एडवरटिजमेंट सर्विस (आईएएस) के 3 लोगों को करोड़ों के फ्रॉड में गिरफ्तार किया है। एसएमएस कर पैसा कमाने का लालच देकर लोगों से ठगी के इस मामले में किंगपिन की अभी तलाश है।
करोड़ों के एसएमएस फ्रॉड में तीन गिरफ्तार, किंगपिन की तलाश
एसपी ऊना दिवाकर शर्मा ने बताया कि एसआई कमल नयन की अध्यक्षता में गठित एसआईटी में मुख्य आरक्षी राजीव कुमार तथा कांस्टेबल देश राज की टीम ने कंपनी के डायरेक्टर विजय कुमार, निवासी चिराना, थाना गुहाना, जिला पानीपत (हरियाणा) को गिरफ्तार किया। इसके अलावा कंपनी के लिए एप डेवलप करने वाले अजय कुमार निवासी नांगली-नंगला, गौतम विहार-नोयडा और एक अन्य गुहाना-पानीपत निवासी सचिन को गिरफ्तार किया।
तीनों आरोपी ऊना में एसएमएस कंपनी के नाम पर एक फर्जी नेटवर्क चलाते थे। इसी दौरान कंपनी के नुमाइंदे हिमाचल और पंजाब के लोगों से करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गए। ऊना पुलिस ने 4 सिंतबर को शिकायतें मिलने के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इनमें कंपनी का एक प्रमुख किंगपिन प्रवीण उर्फ मोहित निवासी चिराना, थाना गुहाना, पानीपत अभी गिरफ्त से बाहर है।
पंजाब के सिटी मानसा थाने में वह उद्घोषित अपराधी है। एसपी ने बताया कि इस मामले में पुलिस के पास कुल 41 शिकायतें आईं थीं, जिनमें 25 फ्रेंचाइजी शामिल हैं। एसपी ने पीड़ितों से आग्रह किया है कि पुलिस को इस मामले में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दें, ताकि पुलिस केस की तह तक जा सके। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।
तीन खातों में मिले केवल 18 लाख
पुलिस ने आरोपियों के बैंक खाते सीज कर दिए हैं। कंपनी डायरेक्टर विजय के तीन बैंक खातों में 18 लाख मिले हैं, जिन्हें ऊना पुलिस ने सीज कर दिया है। गिरफ्तार आईटी एक्सपर्ट अजय से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि उसने सबसे पहले 1 लाख 30 हजार की फीस वसूल कर इस कंपनी के लिए आईएएस नाम से एप तैयार किया।
ऐसे चलता था कारोबार
ऊना कॉलेज के समीप कंपनी मोबाइल एसएमएस करने के नाम पर लोगों को रोजगार दे रही थी। कंपनी से तीन हजार रुपये में आईडी लेने पर 70 दिन के बाद पांच हजार की रकम प्रतिमाह मिलती थी, जिसके चलते प्रदेश सहित बाहरी राज्यों से भी लोग कंपनी के साथ जुड़ने लगे।
हर माह 5 हजार मिलते देख लोग कंपनी के झांसे में आने लगे। लालच में आकर कई ने 10 से 500 आईडी तक में पैसा लगा दिया। कई ने अपने-अपने ऑफिस बनाकर आईडी की फ्रेंचाइजी ले रखी थी, जिसके बाद आगे आईडी सेल करने का काम शुरू कर दिया था।