आधी रात को पहाड़ पर आई तबाही में एक बुजुर्ग दंपति का सब कुछ बह गया। बाढ़ के बीच फंसे इस दंपति को घंटों बाद जिंदा रेस्क्यू किया गया है। हिमाचल के जिला किन्नौर में बादल फटने से मची तबाही में एक बुजुर्ग दंपति ने सबकुछ गंवा दिया। लेकिन इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और बाढ़ में फंसने के बावजूद मौत को मात दे दी।
घर-खेत सब बहे, मगर मौत को मात देकर जिंदा निकला ये बुजुर्ग दंपति
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रात करीब पौने 9 बजे, बटसेरी निवासी सनम छोपेल (70) और 65 वर्षीय उनकी धर्मपत्नी बोरंग छौ को क्या मालूम था कि उनके आशियाने में खरोगला का नाला वर्ष 2007 की भांति फिर कहर बरपाएगा। यह दंपति रोज की भांति खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे कि करीब पौने 9 बजे जोरदार गड़गड़ाहट के साथ खरोगला नाले से प्रलयकारी बाढ़ आनी शुरू हो गई।
बुजुर्ग दंपति के आशियाने के चारों ओर पानी का तेज बहाव बढ़ गया। बुजुर्ग सनम छोपेल ने अमर उजाला को बताया कि वे दोनों पौने 9 बजे से लेकर रात के तीन बजे तक चारों ओर पानी के तेजबहाव, बड़े-बड़े पत्थरों की गर्जना के बीच अपने ईष्ट देव बद्रीनारायण का जाप करते रहे।
करीब तीन बजे जब उनका मकान ढह गया, तो वे लाचार होकर दलदल के बीच बाहर निकलने के लिए दौड़ते रहे। मगर चारों ओर आई तबाही से वह बच नहीं पाए और बाढ़ में फंस गए। घंटों मौत से जूझने के बाद सुबह के समय उन्हें रेस्क्यू किया गया। सुबह उनका बेटा दिलराम और अन्य ग्रामीणों ने बाढ़ के बीच से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रविवार की रात खरोगला, चिस्पान, बटसेरी, थैमगारंग, बौनिगसारिंग सहित बास्पा के साथ लगते घरों के लोगों के लिए मौत का मंजर था। बास्पा के तेज बहाव और विशालकाय पत्थरों की गर्जना से वैली के लोगों को सारी रात जागते रहना पड़ा।