हिमाचल के किन्नौर के रक्षम गांव के नजदीक बादल फटने के बाद अब हालात सामान्य होने लगे हैं। मगर चारों ओर तबाही का मंजर अब साफ साफ दिख रहा है। सड़कें तबाह हो चुकी हैं जबकि सेब के बगीचे बर्बाद हो गए हैं।
बादल फटने के बाद दिखा तबाही का मंजर, सेना ने संभाला मोर्चा, तस्वीरें
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मंगलवार को मौसम ने राहत दी और लोग अपने बगीचे और घर बनाने के काम में जुट गए। अचानक आई बाढ़ ने यहां ऐसे निशान छोड़े हैं जिन्हें भरने में काफी साल लग जाएंगे। सड़कें बहाल करने और मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को अब भी कई महीनों का इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जा रहे हैं।
वहीं, खरोगला नाला में बाढ़ से ध्वस्त हो चुका छितकुल-रक्षम संपर्क मार्ग मंगलवार को भी बंद रहा। हालांकि, आईटीबीपी के जवानों, स्थानीय लोगों और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने पैदल आवाजाही के लिए लकड़ी का अस्थायी पुल बना दिया है। संपर्क मार्ग को खोलने के लिए दोनों ओर से लोनिवि ने दो जेसीबी और एक दर्जन मजदूरों को काम पर लगाया है।
यहां के लोगों की मुख्य आजीविका सेबों से चलती है मगर वह भी बर्बाद हो गए हैं। सोमवार शाम पानी ज्यादा होने की वजह से बटसेरी गांव की ओर भूमि कटाव शुरू होने पर लोग गांव के देवता बद्रीनारायण और विष्णु नारायण की शरण में पहुंचे। गांव को बचाने के लिए लोगों ने ईष्ट देवता की पूजा भी की। बटसेरी देवता के माथस गोवर्धन नेगी और पुजारी रंजीत नेगी ने दावा किया कि पूजा के बाद पानी कम हो गया है और अब गांव को खतरा नहीं है।
बटसेरी गांव के बुजुर्ग दंपति सनम छोपेल और बोंरग छौ की बाढ़ में जान तो बच गई लेकिन जिंदगी भर की पूंजी पल भर में बह जाने से सदमे में हैं। बुजुर्गों को चिंता सता रही है कि अब उनका पालन-पोषन कैसे होगा। इस भयानक बाढ़ ने बुजुर्ग दंपति का एक मकान, दो गौशालाएं और 300 सेब के पौधे तबाह कर दिए हैं।