सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित हिमाचल कैबिनेट की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। धर्मशाला में प्रस्तावित मेगा इन्वेस्टर मीट से पहले मंत्रिमंडल ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए हिमाचल प्रदेश पर्यटन नीति-2019 के प्रारूप को मंजूरी दे दी है।
इसके अनुसार नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए पूंजी निवेश सब्सिडी मिलेगी। अविकसित पर्यटन स्थलों के लिए सरकार पानी और सड़क सुविधा मुहैया करेगी। शिमला, मनाली जैसे शहरों से भीड़ कम करने के लिए नए पर्यटन क्षेत्र विकसित होंगे।
कैबिनेट बैठक में मंजूर नई पर्यटन नीति में ईको, जैविक कृषि, स्नो, झील, साहसिक , धार्मिक, सांस्कृतिक एवं धरोहर, स्वास्थ्य एवं वेलनेस और फिल्म पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। नीति का मुख्य उद्देश्य पर्यटन विकास के लिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। हालांकि, नई पर्यटन नीति में प्रदेश के चाय बागान शामिल नहीं होंगे, क्योंकि चाय बागान लैंड सीलिंग एक्ट 1972 के तहत नियंत्रित हैं।
कैबिनेट ने प्रदेश के लिए केंद्र से स्वीकृत करीब 700 करोड़ के संसाधन सृजन एवं पर्यावरण संवर्द्धन एकीकृत विकास परियोजना (आईडीपी) के तहत 10 जिलों की 428 ग्राम पंचायतों को परियोजना में शामिल करने को मंजूरी दी। इसके बाद इन पंचायतों के वन क्षेत्रों के साथ लगती कृषि भूमि में प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करके इसमें सुधार लाया जा सकेगा। विश्व बैंक से मिले प्रोजेक्ट से इन पंचायतों में पानी के स्रोतों और जल संरक्षण पर काम होगा। इस प्रोजेक्ट में किन्नौर और लाहौल स्पीति जिले शामिल नहीं हैं।
कैबिनेट ने नॉन री-साइकिल-प्लास्टिक वेस्ट और कई तरह के सिंगल यूज प्लास्टिक वेस्ट की दोबारा खरीद के लिए प्रस्तावित नीति को भी मंजूरी दी। इसके तहत 75 रुपये प्रति किलो की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। ये दाम घरों से कूड़ा-कचरा एकत्रित करने और उसे शहरी स्थानीय निकायों के पास जमा करने की एवज में निर्धारित किए हैं।