कालका-शिमला रेल लाइन बीते 112 सालों में एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाई है। कालका और शिमला के बीच 1903 में टॉय ट्रेन का संचालन शुरू हुआ था। 6 साल बाद 1909 में शिमला रेलवे स्टेशन से रेल ट्रैक 890 मीटर आगे शिमला ऐक्सटेंशन तक बढ़ाया गया। इसके बाद 112 सालों से रेल ट्रैक आगे नहीं बढ़ पाया है। 1814 से 1816 तक हुए एंग्लो नेपाल युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शिमला को बेस कैंप बनाया था।
आजादी का अमृत महोत्सव: 112 साल में एक इंच आगे नहीं बढ़ा कालका-शिमला रेल ट्रैक, जानें रोचक तथ्य
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1905 में बना स्टीम इंजन केसी 520 अभी भी शिमला और कैथलीघाट के बीच संचालित किया जाता है। 1930 में महात्मा गांधी इसी टॉय ट्रेन से लार्ड इरविन से मिलने शिमला आए थे। ब्रिटिश इंजीनियर मिस्टर बड़ोग के नाम पर बड़ोग रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया है।
रेलवे ट्रैक के रोचक तथ्य
ट्रैक की लंबाई 96.57 किलोमीटर
कुल पुल 864
सबसे बड़ा पुल धर्मपुर 70 मीटर
103 सुरंग, एक टूट गई, अब 102
सबसे बड़ी बड़ोग सुरंग 1.1 किलोमीटर, बाबा भलखू ने सुरंग की अलाइनमेंट की थी
919 मोड़, (70 फीसदी ट्रैक मोड़ पर) एक मोड़ पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर धूमती है
10 जुलाई 2008 यूनेस्को वर्ड हैरिटेज का दर्जा दिया
कालका (ऊंचाई 655 मीटर) से शिमला (2076 मीटर) तय करती है ट्रेन
7 कोच वाली ट्रेन के अलावा रेल कार का संचालन
1956 के बाद डीजल इंजन का संचालन शुरू हुआ
2007 में मिला हैरिटेज ट्रैक का दर्जा मिला
कालका और शिमला के बीच 19 स्टेशन
कालका, टकसाल, गुम्मन, कोटी, जाबली, सनवारा, धर्मपुर, कुमारहट्टी, सोलन, सोलन ब्रूरी, सलोगड़ा, कंडाघाट, कनोह, कैथलीघाट, शोघी, तारादेवी, जतोग, समरहिल, शिमला।