कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर गांव में आतंकियों के मुठभेड़ में शहीद हुए बिलासपुर जिला के श्रीनयना देवी की माकड़ी पंचायत के उट्टपर गांव के विजय कुमार ने एक आतंकी को मार गिराया था। इस बात का खुलासा उनकी अंतिम शहादत पर पहुंचे 87 आर्म्ड के 22 आरआर के सूबेदार तिलक राज की ओर से किया गया। इनका कहना है कि एक आतंकी ने इनके सिर में गोली मारी जिससे इनकी मौत हो गई।
सूबेदार तिलक राज का कहना है कि वीरवार रात नौ बजे सूचना मिली थी सोपोर के एक घर में दो आतंकवादी छुपे हुए हैं। सुबह नौ बजे सेना की आतंकियों के साथ मुठभेड़ शुरू हुई। एक आतंकी को तो शहीद विजय कुमार ने मार गिराया, जब वह दूसरे आतंकी की तलाश में आगे बढ़े तो घर की छत पर छिप कर बैठे दूसरे आतंकी ने उन्हें गोली मार दी जो सीधे उनके सिर में जा लगी। इसके बाद सेना ने दूसरे आतंकी को भी मार गिराया।
वहीं शहीद विजय कुमार के बड़े बेटे निशांत (9) का कहना है कि वह बड़ा होकर अपने पिता की शहादत का बदला लेगा। उसका कहना था कि उसके पिता बहादुर थे और बहादुरी से लड़ते हुए शहीद हुए हैं। बड़ा होकर वह भी फौजी बनेगा। जबकि शहीद की माता गज्जो देवी का देहांत तब हो गया था जब वह पहली कक्षा में पढ़ते थे। विजय कुमार अपने चार भाई बहनों में दूसरे स्थान पर थे। प्राथमिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला खुलवीं से की है। जबकि दसवीं भाखड़ा से की है।
पत्नी को नहीं था पता पति की शहादत का- परिजनों का कहना है कि विजय कुमार की पत्नी मेनका को यह पता ही नहीं था कि उनके पति शहीद हो गए हैं, जब परिजन नंगल स्थित उसे बताने गए तो वह एक मंदिर में पूजा अर्चना कर रही थी। इसके बाद परिजन उसे वहां से गांव लेकर आए। शहीद विजय कुमार के दोनों बेटे निशांत व सुशांत नंगल में पढ़ते हैं।
एक तरफ विपदाओं का पहाड़, दूसरी तरफ गर्व- शहीद विजय कुमार की पत्नी मेनका का कहना है कि एक तरफ तो उन पर विपदाओं का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि बच्चे छोटे-छोटे हैं। जबकि दूसरी तरफ उनको पति की शहादत पर गर्व भी है। मेनका का कहना है कि जो तिरंगा उन्हें अपने पति की शहादत पर मिला है वह उसे ताउम्र अपने पास संभाल कर रखेंगी ताकि उसके पति की याद उसके साथ हमेशा रहे। उसे इस बात का फक्र है कि उनका पति देश के लिए शहीद हुआ है।