विश्व शिक्षक दिवस पर सोमवार को प्रदेश के सरकारी स्कूलों के 17 शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पांच साल में 100 फीसदी परिणाम और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए काम करने पर इन शिक्षकों को यह पुरस्कार दिया गया। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने पीटरहॉफ में शिक्षकों को शॉल, टोपी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। पुरस्कार के तौर पर राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों को एक साल और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों को दो साल का सेवा विस्तार दिया गया।
विकास महाजन : रावमापा चंबा के प्रधानाचार्य विकास महाजन को बीते वर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इन्होंने गरीब बच्चों को छात्रवृत्तियां उपलब्ध करवाईं। स्कूल में नामांकन को 716 से बढ़ाकर 928 किया। विद्यार्थियों के लिए कोट और स्वेटर का इंतजाम किया। स्कूल के पुराने भवन की मरम्मत करवाने में सक्रिय भूमिका निभाई। नीट और जेईईई की बच्चों की निशुल्क कोचिंग उपलब्ध करवाई।
नरेंद्र कुमार सूद: पोर्टमोर स्कूल शिमला के प्रधानाचार्य तौर पर शिक्षा के साथ खेलों, सांस्कृतिक गतिविधियों, स्वच्छता और सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों में सराहनीय कार्य किया। परीक्षा परिणाम में बड़े स्तर पर इन्होंने सुधार लाया है। इन्हें शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने पर विभिन्न संस्थानों की ओर से सम्मानित किया गया है। 2018 में भारत शिक्षा रत्न से भी इन्हें सम्मानित किया गया है।
कुमारी देकित डोलकर : रावमापा काजा ने प्रधानाचार्य ने शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कई कार्य किए हैं। कोरोना संकट के बीच प्रधानाचार्य होते हुए भी बच्चों के घर-घर जाकर पढ़ाई करवाई और नोट्स उपलब्ध करवाए। हर घर पाठशाला योजना को सफलतापूर्वक चलाया। इनका चयन सरकार से गठित कमेटी की ओर से किया गया है।
उत्तम सिंह: राउपा धरोटधार बगस्याड के मुख्य अध्यापक ने मंडी में जिन भी स्कूलों में सेवाएं दी हैं वहां के परीक्षा परिणाम बहुत अच्छे रहे हैं। शिक्षा के साथ खेलों, स्वच्छता, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सराहनीय कार्य किया है। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए इनका चयन प्रदेश सरकार की ओर से गठित कमेटी की ओर से किया गया। उत्तम सिंह मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं।