संयुक्त किसान मोर्चा का चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी है। किसानों का काफिला बढ़ता जा रहा है। वीरवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ किसान और महिलाएं मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। किसानों ने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला।
किसान मोर्चा: सरकार से बैठक के बुलावे का इंतजार, वरना होगा बड़ा एलान; कहा-हक की लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे
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पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल पहुंचे
पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल भी वीरवार को मोर्चे में शामिल हुए। उन्होंने किसानों के साथ समय बिताया और लंगर सेवा में हिस्सा लिया। इस दौरान अनमोल ने लंगर सेवा कर रही महिलाओं के पैर दबाए, जिसकी मोर्चे में मौजूद किसानों ने सराहना की।
जगतपुरा से चंडीगढ़ के सेक्टर-48 की तरफ जाने वाली सड़क के एक हिस्से पर किसानों ने मोर्चा लगाया हुआ है। सड़क के दूसरे हिस्से से यातायात सामान्य रूप से चल रहा है। वीरवार को बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने के कारण उन्हें सड़क किनारे और उपलब्ध जगहों पर खड़ा किया गया। किसान नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में अगर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या बढ़ती है तो यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार अमेरिका के साथ किसानों के हितों को प्रभावित करने वाला कोई समझौता करती है तो पूरे देश में चक्का जाम किया जाएगा। अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो सेक्टर-48 के पास लगाया गया पक्का मोर्चा आगे भी बढ़ाया जा सकता है। किसान यहां पहुंच चुके हैं और अपनी मांगें मनवाने के बाद ही वापस जाएंगे।
पंजाब से आए किसानों और मजदूरों के लिए मोहाली के आंदोलन स्थल पर 15 लंगर चलाए जा रहे हैं। ये लंगर सात दिनों से किसानों को भोजन और अन्य सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के मोहाली सहित अन्य जिलों के किसान इन लंगरों का संचालन कर रहे हैं। यूनियन के राज्य प्रेस सचिव परमदीप सिंह बैदवान ने बताया कि 15 से अधिक लंगर चल रहे हैं। ये लंगर किसानों और उनके समर्थकों के लिए सुबह, दोपहर और रात में भोजन उपलब्ध कराते हैं। किसान अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पहुंचे हैं। एक सितंबर से उन्हें चाय-पानी सहित सभी आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं। मोहाली के किसान भी इस सेवा कार्य में सहयोग दे रहे हैं।
किसान आंदोलन में बेटे को खोने का दर्द दिल में लिए सुनाम के गांव अलीशेर कलां निवासी राजपाल सिंह एक बार फिर किसानों के संघर्ष में डटे हुए हैं। दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान उनके बेटे की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बावजूद राजपाल सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और चंडीगढ़ में चल रहे सात दिवसीय किसान आंदोलन में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
राजपाल सिंह ने नम आंखों से बताया कि दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान उनके बेटे बलविंदर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। हालत गंभीर होने पर वह उसे बठिंडा लेकर गए, जहां उसका इलाज कराया गया। बाद में हालत में सुधार नहीं होने पर उसे चंडीगढ़ भी शिफ्ट किया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
बेटे की मौत परिवार के लिए गहरा सदमा थी लेकिन राजपाल ने किसान संघर्ष से खुद को अलग नहीं किया। उन्होंने कहा कि बेटा बलविंदर सिंह भी किसान आंदोलन में हमेशा आगे रहता था। वह किसानों की मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने से कभी नहीं डरता था। उसके लिए किसानों का हक सबसे ऊपर था। बेटे की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वह खुद भी हर किसान संघर्ष में शामिल होते रहेंगे।