लुधियाना कचहरी परिसर में ब्लास्ट के बाद एक बार फिर लुधियाना के लोगों को पुराने दिनों की याद आ गई। 14 साल बाद फिर लुधियाना दहला है। 14 साल पहले शृंगार सिनेमा में बम ब्लास्ट हुआ था, जिसमें छह लोगों की जान गई थी और 20 घायल हुए थे। ईद के कारण छुट्टी थी और प्रवासी मजदूर फिल्म देखने पहुंचे थे। शृंगार सिनेमा में ब्लास्ट के बाद लोगों के दिलों में दहशत पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि जहां पुलिस दावा करती है कि शहर पूरी तरह से सुरक्षित है, वहीं आज सभी दावों की पोल खुल गई। इस बार धमाका भी शहर के पॉश इलाकों में बनी अदालत परिसर में हुआ है। 14 अक्तूबर 2007 को ईद थी और सरकारी छुट्टी के कारण कई बाजार और फैक्ट्रियां बंद थीं। शृंगार सिनेमा में फिल्म लगी हुई थी। देर शाम को अचानक सिनेमा में ब्लास्ट हो गया था। इस मामले में चार लोग गिरफ्तार हुए थे।
14 साल बाद फिर दहला लुधियाना: चश्मदीद बोले- तेज धमाके से कान हुए सन्न, चारों तरफ फैला धुआं, क्षत-विक्षत पड़ी थी लाश
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धमाके के बाद समझ नहीं आया...क्या हुआ, चारों तरफ धुंआ
लुधियाना कोर्ट परिसर के अंदर सब कुछ सामान्य चल रहा था। अदालत में केसों की सुनवाई चल रही थी, लोग अपने काम से इधर से उधर जा रहे थे। कोर्ट परिसर की दो इमारतें हैं, एक पुरानी एक नई। जैसे ही 12:15 बजे धमाके की आवाज सुनी तो सभी वकील चैंबर से बाहर निकल आए, यहां तक धमाके के नजदीक चल रही अदालतों में तो अफरा-तफरी मच गई। हर कोई अदालत से बाहर निकल कर अपनी जान बचाने को भागा। इस पूरे माहौल में क्या क्या हुआ, मौके पर मौजूद लोगों ने कुछ इस तरह अपनी बात बताई।
दोपहर के लगभग 12:15 बज चुके थे, उस समय मैं ग्राउंड फ्लोर पर चार नंबर कोर्ट में केस की सुनवाई के लिए खड़ा था। सुनवाई के दौरान अदालत में गवाही चल रही थी। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, इससे पहले कुछ समझ पाते कि शीशे चकनाचूर हो गए। केस की सुनाई कर रहे जज साहब खुद इस धमाके से घबरा गए और तुरंत अपने चैंबर में चले गए। मैं खुद भी जान बचाने के लिए बाहर निकला तो देखा कि ऊपरी मंजिल से धुंआ उठ रहा था। लोग बेतहाशा इधर-उधर भाग रहे थे। कुछ समय बाद समझ में आया कि दूसरी मंजिल पर बम धमाका हुआ है। एडवोकेट अमन मान
दोपहर के समय मैं तीसरी मंजिल पर अपने क्लाइंट के साथ किसी केस को लेकर बातचीत कर रहा था। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि कुछ देर तो मैं सन्न रह गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिरकार हुआ क्या है। फिर मैने देखा कि दूसरी मंजिल पर धुंआ निकलन रहा है। मेरे साथी वकीलों ने लोगों को शोर मचा बाहर जाने के लिए कहा। हम सभी लोग नीचे आ गए, इसके बाद मैं दोबारा दूसरी मंजिल पर धमाके वाली जगह पर गया। सब कुछ तहस नहस हो चुका था, वहां एक गठरी नुमा चीज दिखी तो मैने सोचा शायद फाइलों की गठरी है। मैने पास जाकर देखा तो वह शव था, जोकि पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो चुका था। उस मंजर को देखकर दिल पूरी तरह से दहल उठा। एडवोकेट नरिंदर आदिया
मैं कोर्ट से कुछ दस्तावेज लेकर अपने चेंबर में पहुंचा ही था कि अचानक धमाके की आवाज सुनी। पहले मैंने सोचा कि शायद आम लोगों के लिए लगी लिफ्ट की हालत काफी खस्ता है, शायद वह टूट गई है। जैसे बाहर निकल देखा तो दूसरी मंजिल पर धुएं का गुबार दिखा। तब हमने लोगों से सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने के लिए कहा। किसी तरह परिसर को खाली कर हम सभी लोग नीचे आए। सच में धमाका इतना भीषण था कि कुछ देर तक हमारे कान सन्न हो गए। एडवोकेट मनु पुरंग