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63 के हुए शिवराज: पांव-पांव वाले भैया से मामा बनने तक का सफर; देश के दिल पर राज करने में बनाया रिकॉर्ड

Sat, 05 Mar 2022 11:29 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Sat, 05 Mar 2022 11:29 AM IST
सार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपना 63 वां जन्मदिन मना रहे हैं। 13 साल की उम्र में संगठन से जुड़े शिवराज सिंह आज के दौर में सत्ता और संगठन दोनों की पहली पसंद बन चुके हैं।

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Shivraj turns 63: Journey from MLA to Chief Minister; Record made in ruling the heart of the country
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपना 63 वां जन्मदिन मना रहे हैं। 13 साल की उम्र में संगठन से जुड़े शिवराज सिंह आज के दौर में सत्ता और संगठन दोनों की पहली पसंद हैं। चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की बागडोर संभाल रहे शिवराज के नाम प्रदेश के सबसे ज्यादा लंबे समय तक, और सबसे ज्यादा बार सीएम बनने का रिकॉर्ड है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर आपको बताते हैं उनके बचपन से लेकर अब तक के राजनैतिक सफर के बारे में...


छोटी उम्र में RSS से जुड़े, स्कूली दौर से ही सियासत में था रुझान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जन्म सीहोर जिले के छोटे से गांव जैत में 5 मार्च 1959 को हुआ था। भोपाल में शुरुआती पढ़ाई की, महज 13 साल की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए। किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान आगे चलकर प्रदेश की बागडोर संभालेंगे, ये शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा। लेकिन सत्ता में उनकी रुचि उनके स्कूली दिनों में दिख गई थी। स्कूली दिनों में वे एक बार कल्चर सेक्रेटरी का चुनाव हार गए, लेकिन अगले चुनाव में वे मॉडल स्कूल छात्र संघ के अध्यक्ष बने। 

ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे 
अपने कॉलेज के दिनों में शिवराज सिंह चौहान बीजेपी की छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1977-78 के दौर में एबीवीपी की भोपाल इकाई के सचिव बने, 1978 से 80 के बीच संयुक्त सचिव बने और 1980-82 में एबीवीपी के प्रदेश मंत्री बने। उनका सफर यही नहीं रूका, शिवराज 1982-83 में एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य नियुक्त किए गए। शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एमए किया है। वे दर्शन शास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। 

 
Shivraj turns 63: Journey from MLA to Chief Minister; Record made in ruling the heart of the country
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की छात्र राजनीति के समय की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
1990 से शुरू हुआ राजनैतिक सफर
शिवराज सिंह चौहान ने 1990 में अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत बुधनी से की। यहां से वे पहली बार विधायक बने, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्होंने विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी ने उन्हें विदिशा लोकसभा सीट से टिकट दिया और वे यहां से 10वीं लोकसभा के सांसद बने। 1992 में उन्हें संगठन ने बीजेपी का महासचिव बनाया। वहीं इसी साल उन्होंने साधना सिंह से शादी की। वे 1992 से 1994 तक बीजेपी के महासचिव रहे। 

अटल बिहारी वाजपेयी की सीट से 5 बार सांसद बने
भारतीय जनता पार्टी ने 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए फिर उन पर भरोसा जताया और उन्हें विदिशा से टिकट दिया। वे दूसरी बार विदिशा से जीते, तीसरी बार 1998 में शिवराज सिंह चौहान ने फिर 12 वीं लोकसभा का चुनाव जीता, वहीं इसके बाद चौथी बार भी वे लोकसभा सदस्य चुने गए। संसद में लंबा सफर तय करने के बाद शिवराज 2002 में संगठन की तरफ वापस लौटे और बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बनाए गए। 2003 में वे महासचिव बने और 2004 में 14वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। कुल मिलाकर शिवराज सिंह चौहान 5 बार सांसद चुने गए।  

2005 में प्रदेश की राजनीति में की वापसी
राजनेता पहले विधायक बनते हैं और फिर केंद्र की राजनीति में शामिल होते हैं, लेकिन शिवराज लगातार 5 बार लोकसभा सांसद बनने के बाद प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हुए। 2005 में मध्य प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनने के साथ उन्होंने प्रदेश की राजनीति में वापसी की। केंद्र से वापस आने के बाद उनके राजनैतिक सफर ने एक नया आयाम छुआ और 29 नवंबर 2005 को वे पहली बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 12 दिसंबर, 2008 को दूसरी बार और 14 दिसंबर 2013 को वह तीसरी बार प्रदेश के मुखिया बने, 12 दिसंबर 2018 तक वे इस पद पर काबिज रहे। कुछ समय के लिए प्रदेश की सत्ता कांग्रेस के हाथ में गई लेकिन 13 मार्च 2020 को फिर बीजेपी सत्ता में आई और चौथी बार शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 
Shivraj turns 63: Journey from MLA to Chief Minister; Record made in ruling the heart of the country
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कॉलेज के दिनों की तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
सशक्त जननायक
शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के एक ऐसे जननेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं, जो संगठन से लेकर सत्ता तक लोगों को साधने का हुनर जानता है। पार्टी ने हर बड़े पद की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी और उन्होंने उसे पूरी ईमानदारी से निभाया। सांसद, विधायक, पार्टी अध्यक्ष जैसे हर पद में रहकर उन्होंने खुद को साबित किया। संगठन की चुनौतियों के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बैठाने में वे सफल रहे। हर बार चुनावी मैदान में जीत का सहरा बांध वे 4 बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए और साबित किया कि वे सिर्फ वोट नहीं बल्कि लोगों के दिलों को भी जीतना जानते हैं।

कांग्रेस को किया सत्ता से दूर 
शिवराज सिंह चौहान के सीएम बनते ही कांग्रेस सत्ता से दूर होती चली गई। प्रदेश में करीब डेढ़ दशक से ज्यादा के वक्त से कांग्रेस सत्ता पाने के लिए संघर्ष कर रही है। शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी मजबूत हुई। उन्होंने प्रदेश के कई इलाकों को भाजपा का गढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाई। पार्टी ने न केवल विधानसभा में बल्कि लोकसभा चुनावों में भी बेहतर प्रदर्शन किया। 

आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की संकल्पना
आत्मनिर्भर भारत की तर्ज पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश बनाने की संकल्पना रखी। वे प्रदेश में कृषि को आधार बनाकर मध्य प्रदेश को मजबूती प्रदान करने की दिशा में अग्रसर हैं। वहीं, युवाओं को रोजगार देने और प्रदेश में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए भी वे प्रदेश में ही उद्योगों को स्थापित करने कदम आगे बढ़ा रहे हैं।  

किसानों के हितैषी
किसान पुत्र होने के नाते शिवराज सिंह चौहान किसानों के दर्द को अच्छी तरह समझते हैं। प्रदेश का किसान जब भी पीड़ा में होता है, शिवराज संकटमोचन बन कर उनका दुख-दर्द बांटने पहुंच जाते हैं। बारिश ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान हो या किसानों की कोई और समस्या हो शिवराज उनकी हर संभव मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। किसानों को राहत राशि बांटने में वे सबसे आगे रहे। उनकी किसान हितकारी योजनाओं का ही परिणाम है कि मध्य प्रदेश आज बीमारू राज्य से विकासशील राज्य बनकर उभरा है। उनके नेतृत्व में प्रदेश ने 7 बार कृषि के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर कृषि कर्मण अवार्ड जीता है।
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Shivraj turns 63: Journey from MLA to Chief Minister; Record made in ruling the heart of the country
पत्नी साधना सिंह के साथ सीएम शिवराज सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
मामा के नाम से लोकप्रिय
प्रदेश में लगातार घटती बेटियों की संख्या में सुधार के लिए मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की। प्रदेश के बच्चों के बीच लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मामा के नाम से जाने जाते हैं। आज प्रदेश में 40 लाख लाड़लियां है जिन्हें लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। प्रदेश की बेटियां शिक्षित होने के बाद अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और सशक्त बनें इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई योजनाएं बनाई हैं। बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए लाड़ली लक्ष्मी 2.0 योजना भी लांच की है। तो वहीं बेटियां आसानी से स्कूल पहुंच सकें इसके लिए साइकिलें प्रदान की जाती हैं। बेटियों से उनका स्नेह किसी से छुपा नहीं है, यही वजह है कि प्रदेश में चाहे जो भी सरकारी कार्यक्रम हो उसकी शुरुआत कन्या पूजन से ही की जाती है। 

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध 
महिला स्वसहायता समूहों के जरिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में नारी सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार और हाटों में प्लेटफॉर्म देकर उनके हुनर को पहचान देने का काम भी किया जा रहा है। प्रदेश में कई ऐसे काम हैं जो प्रदेश सरकार महिला स्व-सहायता समूहों से कराती है।

हर रंग में रंग जाने वाले नेता
आदिवासी महोत्सव हो या होली मिलन, दीपावली हो या क्रिकेट का मैदान शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए भी हर रंग में रंग जाने वाले नेताओं में शुमार हैं। वे होली की हुड़दंग में शामिल हो जाते हैं। खेल के मैदान में खेलने पहुंच जाते हैं। गांव जाते हैं तो उनपर देसी रंग छा जाता है। नर्मदा जयंती हो तो वे नर्मदा मैया की सेवा में जुट जाते हैं।  
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Shivraj turns 63: Journey from MLA to Chief Minister; Record made in ruling the heart of the country
बच्चों के साथ क्रिकेट के मैदान में सीएम शिवराज - फोटो : सोशल मीडिया
पर्यावरण प्रेमी
शिवराज सिंह चौहान ऐसे पहले नेता हैं जो अपने दिन की शुरुआत एक पेड़ लगाकर करते हैं। वे खुद तो पेड़ लगाते ही हैं दूसरों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। पर्यावरण बचाने और वृक्षारोपण करने के लिए वे एक मिसाल बन चुके हैं। लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करने और जोड़ने के लिए वे अंकुर अभियान चला रहे हैं।

गौरव दिवस मनाने की शुरुआत
शिवराज सिंह चौहान जमीन से जुड़े नेता हैं। वे लोगों को भी अपनी संस्कृति और माटी से जोड़ना चाहते हैं, यहीं वजह है कि उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने गांव और शहरों का गौरव दिवस, जन्मदिन मनाने की अपील की, ताकि लोग अपने गांव, अपने शहर का विकास करें। उसके विकास की रूपरेखा खुद बनाएं और सरकार उस पर काम करें। उनकी इस योजना को केंद्र ने भी सराहा और पीएम मोदी ने देशवासियों से अपने शहर का जन्मदिन मनाने की अपील की। 

शिवराज सिंह चौहान भले ही 63 साल के हो गए हों, लेकिन अब भी वे एक युवा नेता की तरह जोशीले हैं। घंटों सभाएं करना, पैदल यात्राएं करना। किसी भी काम को करने से वे पीछे नहीं हटते। राजनीति के शुरुआती दौर में वे कभी पैदल गांवों का सफर किया करते थे, जिसके चलते लोग उन्हें पांव-पांव वाले भैया के तौर पर जानते थे। राजनैतिक करियर के सफल 32 साल पूरे करने के बाद भी लोग उन्हें उनके उसी देसी अंदाज से जानते हैं और बच्चे 'मामाजी' के नाम से। 
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