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भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार: 62,500 प्रतिष्ठानों की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली,कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल

Tue, 15 Sep 2026 04:32 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 15 Sep 2026 04:32 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार से जुड़े 62,500 प्रतिष्ठानों के मामले की सुनवाई जस्टिस के अवकाश पर होने से टल गई। निगम 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस और 190 को बंद करने की कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर चुका है। रहवासियों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कुछ प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने का दावा किया है। अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय होगी।

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Business operations in Bhopal's residential areas: Supreme Court hearing for 62,500 establishments deferred; a
भोपाल में सीलिंग कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई टल गई। संबंधित जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब मामले की अगली तारीख बाद में तय होगी। इस मामले में भोपाल के करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों का रिकॉर्ड और नगर निगम की अब तक की कार्रवाई अहम है। नगर निगम अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर चुका है। वहीं, रहवासियों की ओर से निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दस्तावेज और आपत्तियां कोर्ट के सामने रखी गई हैं। रहवासियों का दावा है कि कुछ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के बाद वे दोबारा खुल गए हैं।
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5 अगस्त के आदेश के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त को महत्वपूर्ण आदेश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करना शुरू किया था। करीब 15 दिन तक नोटिस देने की कार्रवाई चली। निगम के रिकॉर्ड में सूचीबद्ध करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों में से 8084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद तीन दिन तक कार्रवाई करते हुए 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया गया था।
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व्यापारियों के विरोध के बाद रुकी सीलिंग
नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में भोपाल के व्यापारियों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया था। व्यापारियों के सड़क पर उतरने के बाद निगम की कार्रवाई रोक दी गई। पिछले करीब 15 दिन से सीलिंग और प्रतिष्ठान बंद करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब अगली सुनवाई में कोर्ट निगम की रिपोर्ट और रहवासियों की आपत्तियों के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश दे सकता है।
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रहवासियों ने निगम की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि रहवासियों की ओर से ऐसे दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए हैं, जिनसे कार्रवाई की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। रहवासियों का आरोप है कि जिन प्रतिष्ठानों को बंद या सील किया गया था, उनमें से कुछ दोबारा संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि केवल नोटिस जारी करना या कुछ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी मामलों में समान कार्रवाई होनी चाहिए।

अरेरा कॉलोनी के बड़े मॉल पर भी आपत्ति
रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अरेरा कॉलोनी के कई बड़े मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी सवालों के घेरे में हैं। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से सड़क पर भीड़, यातायात और शोर बढ़ रहा है।
उनका तर्क है कि इससे सार्वजनिक शांति के साथ सुरक्षा भी प्रभावित होती है। स्कूली बच्चों की आवाजाही और बढ़ते ट्रैफिक के कारण दुर्घटना की आशंका को लेकर भी रहवासी चिंता जता रहे हैं।


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सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था
इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी थी। निगम अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल कर चुका है। अब अगली तारीख पर इस रिपोर्ट के साथ रहवासियों की आपत्तियों और कार्रवाई की स्थिति पर सुनवाई होगी। 

 
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