स्मार्ट सिटी के तहत इंदौर में चल रहे चौड़ीकरण के काम में अब धार्मिक स्थलों को तोड़ने की कवायद की जा रही है, जिस पर विरोध जताया जा रहा है। करीब दो सौ साल पुराने मंदिर को तोड़े जाने को लेकर मामला गर्मा रहा है। नगर निगम अपनी जिद पर अड़ा है तो मंदिर का संचालन करने वाले आग्रह कर रहे हैं कि इसे तोड़े बिना भी रास्ता निकल सकता है।
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मंदिर में विराजित गणपति की प्रतिमा
- फोटो : सोशल मीडिया
मामला मल्हारगंज का है। यहां प्रसिद्ध गणपति मंदिर है। इसे छोटा गणपति मंदिर व पिता-पुत्र के मंदिर के नाम भी जानते हैं। मंदिर के एक तरफ पुलिस थाना है तो दूसरी तरफ लाल अस्पताल। बीच में यह मंदिर स्थित है। यह मंदिर पुरातन निर्माण शैली का अद्भुत प्रतीक है और इसमें भगवान गणेश की आदमकद प्रतिमा है। मंदिर में शिवलिंग भी है और समाधि स्थल भी बना हुआ है। पास में ही तात्या की बावड़ी है। पहले किबे परिवार इस मंदिर का संचालन करता था क्योंकि उन्हीं के पूर्वजों द्वारा यह स्थापित है लेकिन बाद में सबकी सहमति से इसे ट्रस्ट में बदला गया। इसके बाद से यह हेरम्ब न्यास का मंदिर हो गया। प्रतिदिन सैकड़ों लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
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मंदिर में विराजित है शिवलिंग
- फोटो : सोशल मीडिया
मंदिर तोड़े बिना भी हो सकता है काम
स्मार्ट सिटी के तहत रोड चौड़ीकरण करने के लिए इस मंदिर को तोड़ने की योजना है। नगर निगम का कहना है कि मंदिर का पांच फीट हिस्सा तोड़ा जाएगा। इस मामले में मंदिर से जुड़े अजय किबे ने बताया कि यह मेरे परिवार का बनाया हुआ ऐतिहासिक मंदिर है। स्मार्ट सिटी के तहत इसको तोड़ने की बात हुई तो नगर निगम कमिश्नर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि रोड चौड़ीकरण के बीच में मंदिर आ रहा है इसलिए पांच फीट तोड़ना पड़ेगा। आयुक्त से कहा कि मैं खुद इंजीनियर हूं। यदि मंदिर को पांच फीट तोड़ा गया तो वह पूरा धराशायी हो जाएगा। यदि रोड चौड़ीकरण की बात है तो मंदिर के आसपास की दुकानों को हटाकर भी रास्ता बनाया जा सकता है। इसके अलावा आप मुझे नक्शा बता देंगे तो उसके हिसाब से मैं बता सकता हूं कि क्या रास्ता निकल सकता है लेकिन नगर निगम ने अब तक नक्शा नहीं बताया। वे मंदिर को तोड़ने की बात कर रहे हैं।
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मंदिर में इस तरह है सजावट
- फोटो : सोशल मीडिया
किबे ने बताया कि पूरा मंदिर पत्थरों से बना है। तोड़ने पर मूर्ति भी खंडित हो सकती है। हजारों लोगों की आस्था पर चोट होगी। शहर का विकास जरूरी है लेकिन इसके लिए ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को तो नहीं तोड़ा जा सकता। इस मामले में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से बात की है। उन्होंने कहा है कि अधिकारियों से चर्चा करेंगी। आरएसएस के कार्यकर्ता भी इसे तोड़ना गलत बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि मंदिर तोड़े बिना कैसे रास्ता निकल सकता है इस पर बात करेंगे। किबे ने बताया कि हम इसके लिए सोशल मीडिया पर अभियान भी शुरू कर रहे हैं। हम बताएंगे कि मंदिर को गिराने से शहर को कितना बड़ा नुकसान होगा। टीबी अस्पताल के लिए जमीन का एक हिस्सा (तात्या की बावड़ी) किबे परिवार द्वारा स्थानीय प्रशासन को दान में दिया गया था। आसपास की दुकानें छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन मंदिर को तोड़ा जाना उचित नहीं है।