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पन्ना: मझगांय बांध में बढ़ता पानी, विस्थापितों के सब्र का बांध टूटा; चिता जलाकर उठाई हक की आवाज

Sun, 13 Sep 2026 11:48 AM IST
पन्ना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना Published by: पन्ना ब्यूरो Updated Sun, 13 Sep 2026 11:48 AM IST
सार

मझगांय बांध में बढ़ते जलस्तर के बीच प्रभावित गांवों के लोगों ने वनहरीकला टपरिया में चिता आंदोलन शुरू किया। केन-बेतवा, मझगांय और रुंझ बांध के प्रभावित किसान व आदिवासी एक मंच पर जुटे। प्रदर्शनकारियों ने मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
 

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Panna Dam Crisis Submerged Villages Force Displaced Locals into 'Chita Andolan' Over Pending Rehabilitation
विस्थापितों का आंदोलन फिर तेज हुआ - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पन्ना के मझगांय बांध में बढ़ते जलस्तर के बीच प्रभावित गांवों में पानी बढ़ने और कई हिस्सों के टापू में तब्दील होने के बीच विस्थापितों का आंदोलन फिर तेज हो गया है। अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर प्रभावितों ने मझगांय बांध क्षेत्र के वनहरीकला टपरिया में चिता आंदोलन शुरू किया। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय बांध और रुंझ बांध के प्रभावित किसान और आदिवासी एक मंच पर जुटे। जय किसान संगठन के बैनर तले हुए प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने किया।
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प्रदर्शन के दौरान प्रभावितों ने आरोप लगाया कि बांध में पानी बढ़ रहा है और उनके घर-खेत डूबने की स्थिति में हैं, लेकिन मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। प्रभावितों का कहना है कि जिन परिवारों ने विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन और घर छोड़े, उन्हें ही अब अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
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'सिर्फ गांव और घर नहीं, संविधान और मानवता भी डूब रही'
अमित भटनागर ने जिला प्रशासन पर असंवेदनशीलता, तानाशाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "सिर्फ गांव और घर ही नहीं डूब रहे हैं, देश का संविधान और मानवता भी डूब रही है।" उन्होंने कहा कि विस्थापितों के त्याग पर परियोजनाएं खड़ी हो रही हैं, लेकिन उन्हीं लोगों को मुआवजा और पुनर्वास के लिए परेशान होना पड़ रहा है। भटनागर ने केन-बेतवा परियोजना से जुड़े मुआवजा प्रकरण में लोकायुक्त की कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि प्रभावितों से पैसे मांगे जाने के आरोप गंभीर हैं। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के बावजूद यदि व्यवस्था में सुधार नहीं होता तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रभावितों की सुनवाई आखिर कौन करेगा।
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'चिता की आग अब सिर्फ प्रतीक नहीं, सवाल बन चुकी है'
मझगांय बांध क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बीच ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। प्रभावितों का कहना है कि कई घर और रास्ते पानी से प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन पुनर्वास और मुआवजे के सवाल अब भी कायम हैं। इसी मुद्दे को लेकर रुंझ बांध और केन-बेतवा परियोजना के प्रभावित भी आंदोलन में शामिल हुए। अमित भटनागर ने कहा, 'हम विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था के विरोधी हैं, जिसमें विकास की कीमत वही लोग चुकाएं, जिनके घर, खेत और जीवन परियोजनाओं के लिए कुर्बान हो रहे हैं।' उन्होंने कहा कि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो चिता आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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छतरपुर में बदलाव, पन्ना प्रशासन पर असंवेदनशीलता का आरोप
भटनागर ने कहा कि छतरपुर में प्रशासनिक बदलाव के बाद प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों द्वारा लोगों की समस्याएं सुनने और सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास दिखाई दे रहे हैं, जबकि पन्ना में प्रभावितों की समस्याओं को लेकर प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का संदेश स्पष्ट है- न्याय नहीं तो बांध नहीं। जल, जंगल, जमीन और जीवन के साथ संविधान व लोकतंत्र की रक्षा भी जरूरी है।

कांग्रेस पदाधिकारियों ने प्रदर्शन को दिया समर्थन
प्रदर्शन स्थल पर जिला कांग्रेस के पदाधिकारी भी पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। इनमें कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष राकेश गर्ग, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी शिवजीत सिंह, अजयगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश यादव, कुंवरपुर मंडल अध्यक्ष बालकरण यादव, पिसता मंडल अध्यक्ष कामता अहिरवार, मझगांय सेक्टर अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह, युवा कांग्रेस नेता कमलेश गुप्ता, मैकू नन्ना अहिरवार सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।प्रदर्शन में मझगांय डैम प्रभावित मंगल यादव, दीपक द्विवेदी, गया प्रसाद कोंदर, कलावती आदिवासी, महेश बंसकार, कृपाल रजक, भागचन्द्र यादव, मेवालाल प्रजापति, उपेन्द्र राजेंद्र सिंह यादव, ममता आदिवासी, भुरीबाई कोंदर, सरस्वती आदिवासी, सुनीता अहिरवार, सावित्री अहिरवार सहित बड़ी संख्या में प्रभावित शामिल हुए। रुंझ डैम प्रभावित रामौतार कोंदर, श्याम कोंदर, रामस्वरूप पाल, राकेश कोंदर, जगिया कोंदर, कौशल्या कोंदर, सुखदेव कोंदर, राम दुलारे कोंदर, ठाकुरदीन कोंदर, भोला प्रसाद गौतम, नरपत कोंदर, महाप्रसाद कोंदर समेत अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे। ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन प्रभावित प्रमोद यादव, पूरन यादव, शांता सोनकर और मुलायम यादव ने भी प्रदर्शन में सहभागिता की।
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