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MP: नर्मदा नदी, सहस्त्रधारा में 10 साल में 250 पर्यटकों की गई जान, हादसों के बाद भी प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

Fri, 07 Apr 2023 07:53 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 07 Apr 2023 07:53 AM IST
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250 tourists lost their lives in Narmada River, Sahastradhara in 10 years,
10 साल में सहस्त्रधारा, नर्मदा नदी में 250 लोगों ने गंवाई जान - फोटो : अमर उजाला
धार्मिक एवं पर्यटन नगरी महेश्वर सैलानियों के पसंदीदा पर्यटक स्थलों में से एक है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों के मामले में यहां लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं। महेश्वर के प्रमुख स्थान नर्मदा तटीय घाट, सहस्त्रधारा में पिछले 10 वर्षों में 250 सैलानी जान गवां चुके हैं। हाल ही में इंदौर से परिवार सहित घूमने आए पिता-पुत्र की भी सहस्त्रधारा में डूबने से जान जा चुकी है। बावजूद इसके यहां सुरक्षा इंतजामों पर प्रशासन का ध्यान नहीं जा सका है। आश्चर्य की बात यह है कि शून्य सुरक्षा इंतजामों के बाद भी जिले के मुखिया महेश्वर को पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं। 


यहां से पांच किलोमीटर दूर स्थित सहस्त्रधारा पर्यटन स्थल सैलानियों के बीच अपनी खासियतों की वजह से काफी लोकप्रिय है। यहां सैकड़ों चट्टानों के बीच से बहती पुण्य सलिला नर्मदा के अनुपम सौन्दर्य के दर्शन होते हैं। महेश्वर यात्रा सहस्त्रधारा जाए बिना अधूरी मानी जाती है। पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय स्तर की कैनो सलालम स्पर्धा का आयोजन स्थल होने से सहस्त्रधारा की लोकप्रियता और बढ़ गई है। हजारों साल पुराने इस स्थान पर साल भर सैलानियों का तांता लगा रहता है। नर्मदा नदी का अप्रतिम हिस्सा सहस्त्रधारा का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि सहस्त्रधारा वही स्थल है जहां भगवान कार्तिकेय वीर्य सहस्त्रबाहु ने अपनी सहस्त्र भुजाओं से दशानन रावण को बंदी बनाया था। 
250 tourists lost their lives in Narmada River, Sahastradhara in 10 years,
प्रशासन सुरक्षा व्यवस्थाओं की ओर नहीं दे रहा ध्यान - फोटो : अमर उजाला
क्यों है खतरनाक  
सहस्त्रधारा जितना खूबसूरत स्थान है, उससे कहीं ज्यादा यहां जान का जोखिम भी है। सैकड़ों चट्टानों के बीच बहती नर्मदा में कई ऐसे स्थान हैं, जहां पानी की गहराई का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। इस जोखिम से अनजान सैलानी चट्टानों के बीच स्नान करने के इरादे से पहुंच जाते हैं। ऐसे में तेज बहाव में फंसने से वे तिनके की तरह बहने लगते हैं और बाहर निकलना संभव नहीं होता। तेज बहाव लोगों को पैनी चट्टानों के बीच से बहा कर दूर तक ले जाता। इस बीच चट्टानों से टकराने से उनकी जान चली जाती है। हाल ही में 26 मार्च को इंदौर से परिवार सहित महेश्वर घूमने आए आईटी इंजीनियर अमन पिता अखिलसिंह (38 वर्ष) व उनका बेटा रुद्राक्ष (16 वर्ष) की सहस्त्रधारा में डूबने से जान जा चुकी है। 
  
सुरक्षा गार्ड तक नहीं 
महेश्वर में सुरक्षा इंतजामों के हाल दयनीय हैं।  मात्र अहिल्या घाट के अलावा कहीं भी चेतावनी के बोर्ड नहीं लगे हैं। यहां तक कि हादसों के लिए कुख्यात सहस्त्रधारा में भी चेतावनी के बोर्ड कहीं भी नजर नहीं आते। इसके अलावा यहां कोई सुरक्षा गार्ड भी तैनात नहीं हैं। ऐसे में अनजान पर्यटक गहरे पानी में भारी जोखिम वाले स्थानों तक पहुंच जाते हैं। परिणामस्वरूप उनकी जान पर बन आती है। भीड़ बढ़ने पर एक या दो पुलिसकर्मी की तैनाती कर दी जाती है, लेकिन तेज बहाव में डूबते लोगों की जान बचाने का प्रशिक्षण नहीं होने से वे कुछ नहीं कर पाते। नियमानुसार ऐसे जोखिम भरे स्थानों पर प्रशिक्षित तैराक नियुक्त होना चाहिए जो आपात स्थिति में पर्यटकों की जान बचा सकें। 

महिलाओं के लिए सुरक्षित
एक मार्च 2023 को मप्र टूरिज्म बोर्ड ने महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल योजना के तहत सुरक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन महेश्वर में किया था। उस कार्यक्रम में जिले के कलेक्टर शिवराज वर्मा ने कहा था कि महेश्वर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यटन स्थल है और यह महिला टूरिस्ट के लिए पूरी तरीके से सुरक्षित है। क्या केवल महिलाओं की सुरक्षा पर्याप्त है।
250 tourists lost their lives in Narmada River, Sahastradhara in 10 years,
महेश्वर का प्राकृतिक सौंदर्य देखने बड़ी संख्या में आते हैं पर्यटक - फोटो : सोशल मीडिया
प्रशासन का औपचारिक जवाब 
इस संबंध में एसडीएम अग्रिम कुमार से बात की तो उन्होंने औपचारिक जवाब देते हुए कहा कि आपके द्वारा दी गई जानकारी से जिला कलेक्टर शिवराज वर्मा को अवगत करवाएंगे। सहस्त्रधारा पर खतरनाक जगहों पर सूचना बोर्ड एवं पत्थरों पर चिन्हित करवाए जाएंगे ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

यह होना चाहिए 
  • सहस्त्रधारा में खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और बड़े पत्थरों पर सूचनाएं लिखवाई जानी बेहद जरूरी है, ताकि स्थान से अनजान पर्यटक सावधान हो सकें और उन स्थानों तक न पहुंच सकें।
  • पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी जरूरी है, जो लापरवाह पर्यटकों को जोखिम वाले स्थानों तक जाने से रोक सकें।
  • आपात स्थिति में पर्यटकों की मदद के लिए सहस्त्रधारा में प्रशिक्षित तैराकों की नियुक्त की जानी चाहिए।
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