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बिकने लगी शराब तो बुझने लगे महिलाओं और बच्चों के चेहरे, बेटा बोला- अब फिर वही शुरू हो जाएगा

Tue, 05 May 2020 08:13 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना/अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 05 May 2020 08:13 PM IST
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Women and children are upset due to opening of liquor shops in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
लॉकडाउन के तीसरे चरण में सोमवार से शराब की बिक्री शुरू हो चुकी है। शौकीनों की शराब के लिए बेताबी दिन होते ही नजर आने लगी थी, वहीं घर के लोगों की नींद इसलिए उड़ गई कि अब फिर से शुरू हो जाएगी घर में कलह। घर में खाली बैठा पति शराब पीएगा। वहीं लॉकडाउन के दौरान के रैपिड सर्वे बता रहे हैं कि शराब बंदी के चलते परिवारों की खुशियां लौट आईं हैं।


पिछले कई दिनों से पत्नी-बच्चों से गाली-गलौज और मारपीट बंद थी। खाते में आए रुपयों से शराब नहीं, घर में राशन आया है। महिला समाख्या ने लॉकडाउन शुरू होने के एक हफ्ते बाद यानी एक अप्रैल से लखनऊ के नगरीय और 19 जिलों के ग्रामीण इलाकों में टेलीफोन के जरिए रैपिड सर्वे शुरू कराया था। इसके अलावा राज्य समाज कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित परिवार परामर्श केंद्र सुरक्षा व नॉन फॉरमल एजुकेशन सेंटर ने तीन मई को अपनी सर्वे रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया है। पेश है एक रिपोर्ट।

शराब बंदी में बंद हुए थे झगड़े
महिलाएं-बच्चे बोले-लॉकडाउन का सबसे बड़ा फायदा था शराब का न बिकना, हिंसा बंद हुई और खाते में आने वाले पैसे से पति ने घर में भरवाया राशन।
महिला समाख्या के रैपिड सर्वे, राज्य समाज कल्याण बोर्ड के काउंसलिंग सेंटर सुरक्षा और नॉन फाॅर्मल एजुकेशन सेंटर की रिपोर्ट में हुआ खुलासा।
 
Women and children are upset due to opening of liquor shops in lucknow
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

केस-1: पापा सुबह ही जाकर ले आए शराब
सरोजनीनगर की 19 साल की बेटी बोली, पिछले एक महीने में पापा ने न तो एक बूंद शराब पी, न ही मम्मी को एक भी दिन रोना पड़ा। आम दिनों में शायद ही कोई दिन ऐसा होता हो, जब पापा शराब पीकर घर न आते हों। झगड़े की नौबत तो यहां तक आ जाती थी कि किसी-किसी दिन हमारे यहां चूल्हा ही नहीं जलता था। आज पापा सुबह ही जाकर शराब ले आए, फिर वही सब शुरू हो जाएगा। 

केस-2: पापा बोले, अब नहीं पीएंगे 
अलीगंज निवासी एक परिवार के बच्चों का कहना है कि लॉकडाउन में शराब न मिलने से हमारे घर में सब कुछ ठीक था। 13 साल का बेटा कहता है कि पापा रोज तो नहीं पीते थे, लेकिन हफ्ते में दो दिन जरूर पीते थे और उन दो दिन का दर्द हम लोग पूरे हफ्ते झेलते थे। जब तक दर्द सही होता, फिर वे दो दिन आ जाते थे। हालांकि उन्होंने कहा कि वे अब शराब नहीं पीएंगे।

Women and children are upset due to opening of liquor shops in lucknow
डॉ. स्मृति सिंह। - फोटो : amar ujala
रैपिड सर्वे से सामने आया ट्रेंड
जेंडर एक्सपर्ट डॉ. स्मृति सिंह के मुताबिक, महिला समाख्या के सामने सरोजनीनगर व मोहनलालगंज के कुछ मामले आए थे। महिला समाख्या ने 19 जिलों में 38 ब्लॉक में नारी अदालत की सदस्यों से रैपिड सर्वे कराया। सर्वे में 3800 और परिवारों से बात की गई। उन्होंने शराब बंदी को लॉकडाउन का सबसे बड़ा फायदा बताया।

 
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Women and children are upset due to opening of liquor shops in lucknow
डॉ. स्वर्णिमा सिंह - फोटो : amar ujala
टेलीफोनिक काउंसलिंग में छलकी खुशी
सुरक्षा व नॉन फॉरमल एजुकेशन सेंटर की काउंसलर डॉ. स्वर्णिमा सिंह ने कहा, लखनऊ के लोनापुर, गांधीनगर, उजरियांव, कनार, महमूदनगर, औरंगाबाद सेंटर से जुड़ी महिलाओं से टेलीफोनिक काउंसििलंग जारी है। बच्चों और महिलाओं ने बताया, इस एक माह में जैसी खुशहाल जिंदगी उन्होंने जी, वैसी कभी नहीं रही।


 
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Women and children are upset due to opening of liquor shops in lucknow
डॉ. शालिनी माथुर - फोटो : amar ujala
50 फीसदी शिकायतों का कारण शराब
पारिवारिक परामर्श केंद्र सुरक्षा की सचिव डॉ. शालिनी माथुर कहती हैं कि हम हर माह करीब 100 केसों की काउंसलिंग करते हैं और पिछले 35 साल का अनुभव है कि इनमें से 50 फीसदी केस शराब के कारण रजिस्टर्ड होते हैं। लॉकडाउन के रुझान बता रहे थे कि शराब न मिलने से परिवार खुश थे।
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