तो यूपी डीजीपी पर क्यों नहीं दर्ज हो सकता मुकदमा?
तमाम दबावों के बाद भी डीजीपी एके जैन पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। जबकि भारत में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर उनके पद पर रहते हुए न सिर्फ एफआईआर दर्ज की गई बल्कि उन पर कारवाई भी की गई। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी इन मामलों का संज्ञान में लेते हुए सरकार से इस आधार पर डीजीपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग कर सकती हैं।
तो यूपी डीजीपी पर क्यों नहीं दर्ज हो सकता मुकदमा?
डीजीपी एके जैन को तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया है। जबकि उन पर गंभीर आरोप थे। ऐसा नहीं हैं कि भारत के दूसरे राज्यों के डीजीपी पर पद पर रहते या पद से मुक्त होने के बाद एफआईआर दर्ज न की गई हो? फिर सरकार आखिर डीजीपी पर केस की मंजूरी देने के मूड में क्यों नहीं है।
तो यूपी डीजीपी पर क्यों नहीं दर्ज हो सकता मुकदमा?
कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने के मामले में डीजीपी एके जैन पर केस चलाने की मंजूरी देने के मूड में सरकार नहीं है। शासन ने माना कि सीबीसीआईडी की रिपोर्ट आई है, लेकिन उस पर अभी किसी तरह का फैसला नहीं लिया गया है। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा का कहना है कि पहले भेजी गई रिपोर्ट और अब आई रिपोर्ट में भिन्नता है। नई रिपोर्ट में एके जैन का नाम बढ़ाने के साथ ही कई धाराएं भी बढ़ा दी गई हैं।
तो यूपी डीजीपी पर क्यों नहीं दर्ज हो सकता मुकदमा?
इस मामले का परीक्षण हो रहा है, जिसके बाद इसे विधि विभाग की राय लेने के लिए भेजा जा सकता है। प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा इस मामले में कुछ भी बोलने से कतराते रहे जबकि कुछ अन्य अफसरों का कहना था कि जो हुआ अच्छा नहीं हुआ।डीजीपी एके जैन को सेवा विस्तार न मिलना तय मानते हुए सीबीसीआईडी ने रीता जोशी के आवास पर हुई आगजनी के मामले में जैन को भी आरोपी बनाते हुए उनके भी खिलाफ केस चलाने की जो अनुमति मांगी है।
तो यूपी डीजीपी पर क्यों नहीं दर्ज हो सकता मुकदमा?
अफसरों का कहना था कि एक तरफ सरकार डीजीपी एके जैन को सेवा विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार को लेटर भेज चुकी थी और उच्च स्तर से इसके लिए पैरवी की जा रही थी, दूसरी तरफ पुराने मामले में जैन को आरोपी बनाते हुए केस चलाने की जो इजाजत मांगी, जो कि सरकार की मंशा के खिलाफ है।