सभी को पता है कि अटल बिहारी वाजपेयी कितने बड़े नेता थे, लेकिन लखनऊ के छोटे-छोटे सरोकारों पर भी जिस तरह सक्रिय रहते थे वह अपने आप में अनोखा था। पढ़ें एक रोचक वाक्या:
लखनऊ का झंडेवाला पार्क सिर्फ लोगों के घूमने-फिरने का नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का भी नजदीकी गवाह रहा है। पर, एक समय ऐसा भी आया जब नगर निगम के मुखिया ने इस पार्क को एक बिल्डर के हाथों बेच दिया।
इसके विरोध में भाजपा के एक कार्यकर्ता अमित पुरी ने लड़ाई शुरू कर दी। मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया। अटल बिहारी वाजपेयी लखनऊ से सांसद थे। संयोग से नगर निगम के चुनाव घोषित हो गए।
अटल जी शायद इसी मौके के इंतजार में थे। इनकी लखनऊ में सभा हुई। पुरी बताते हैं, ‘अटल जी आए और बोले, एक जनाब ने लखनऊ की जमीनें बेचने का बीड़ा उठा रखा है। दूसरी तरफ यह नौजवान इन जमीनों को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। जिस झंडे वाले पार्क को बेचा जा रहा है वह आम पार्क नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास है। यह मेरे साथ अन्याय होगा कि हमारे ही संसदीय क्षेत्र में यह ऐतिहासिक पार्क बेच दिया जाए।
अटल जी ने सिर्फ भाषण नहीं दिया बल्कि अखबारों में लेख भी लिखे। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया। अटल जी की सक्रियता का परिणाम था कि न्यायालय का फैसला भी पक्ष में आया और ऐतिहासिक पार्क बिकने से बच गया।