दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान रविवार शाम हुई हिंसा और युवक रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद सोमवार को बहराइच हिंसा की आग में जल उठा। आक्रोशित हजारों की भीड़ शव लेकर महसी तहसील पहुंची और महराजगंज जाने वाली सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। भीड़ का एक हिस्सा लाठी-डंडे लेकर कस्बे में घुस गया। बाइक के दो शोरूम, एक अस्पताल को आग के हवाले कर दिया। दूसरे समुदाय के गांव में जाकर दो घरों में भी आग लगा दी और पथराव किया।
हिंसा की आग में जला बहराइच: शोरूम, अस्पताल और घर फूंके, हालात को नियंत्रित करने में पुलिस दिखी नाकाम, तस्वीरें
महराजगंज कस्बे में रविवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान गाना बजाने को लेकर दूसरे समुदाय ने आपत्ति जताई थी। इसी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। कुछ ही देर में झड़प शुरू हो गई। विसर्जन में शामिल 24 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा को दूसरे समुदाय के लोग घर में खींच ले गए। बर्बरता के बाद उन्हें गोली मार दी थी। बचाने में राजन समेत 12 से अधिक लोग घायल हो गए थे, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई।
काबू नहीं कर सकी पुलिस
रविवार को हुई हिंसा के बाद ही इलाके में तनाव था। डीएम और एसपी समेत सभी वरिष्ठ अधिकारी देर रात मौके पर पहुंचे थे। रामगोपाल के घर भी भारी फोर्स की तैनाती कर दी गई लेकिन सोमवार को जब भीड़ लाठी-डंडों से लैस होकर आगे बढ़ी तो पुलिस उनको काबू नहीं कर सकी। भीड़ बवाल और आगजनी करती रही और पुलिसकर्मी इधर उधर भागते रहे। कुछ घंटे तक हालात बेकाबू रहे। पूरा इलाका आक्रोशित भीड़ ने अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस की और कंपनियां जब पहुंचीं, उच्चाधिकारी आए तब कुछ बवाल शांत हो सका। हालांकि, इसके बाद भी पूरे जिले में छिटपुट हिंसा जारी रही।
मामला बिगड़ता देख एडीजी लॉ एंड ऑर्डर व एसटीएफ एडीजी अमिताभ यश भी सोमवार दोपहर में बहराइच पहुंचे। उपद्रवियों का बवाल देखकर वह खुद हाथ में पिस्टल लेकर सड़क पर उतरे। उन्हें अकेले ही दौड़ा लिया। हालांकि, इसके पहले उपद्रवियों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ की। इस बीच जब सीधी पिस्टल तानकर अमिताभ दौड़े और एक राउंड फायरिंग की तब उपद्रवी पीछे हटे।