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गोल्डन गर्ल विनेश बोलीं- भूल चुकी हूं कड़वे अनुभव, निशाना अब ओलंपिक स्वर्ण पर

Tue, 11 Sep 2018 03:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 11 Sep 2018 03:31 PM IST
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vinesh phogat shares her experience in lucknow
दिव्या और विनेश फोगट - फोटो : अमर उजाला

जकार्ता में हुए एशियन गेम्स से सोना लेकर पहली बार अपने दूसरे घर लखनऊ आई हरियाणा की पहलवान विनेश फोगट और कांस्य जीतने वाली प्रदेश की पहलवान दिव्या काकरान का साईं सेंटर में सोमवार को स्वागत किया गया। विनेश ने कहा कि लखनऊ से उन्हें बहुत प्यार मिलता है। रियो ओलंपिक में चोट के बाद कॅरिअर खत्म होने का डर बैठ गया था। लखनऊ में ट्रेनिंग का मेरा हौसला बढ़ा और कॉमनवेल्थ व एशियन गेम्स में सोना जीतने में कामयाब रही। वहीं दिव्या ने कहा कि मेडल जीतना सपने के पूरा होने जैसा है। 

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विनेश फोगट - फोटो : अमर उजाला

सब जानते हैं कि रियो में चोटिल होने बाद मेरा ओलंपिक में पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया। उस वक्त कॅरिअर खत्म होने का डर भी मन में बैठ गया था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतकर खुद को साबित किया। अब मेरे सामने टोक्यो ओलंपिक गेम्स में स्वर्ण जीतने की चुनौती है, जिसके लिए मैंने नए सिरे तैयारी शुरू कर दी है। एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली पहली महिला पहलवान विनेश फोगाट ने कुछ इस तरह भविष्य के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दिया। 

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दिव्या और विनेश फोगट - फोटो : अमर उजाला

साई सेंटर मेें आयोजित सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि रेसलिंग के सिलसिले में ज्यादातर मुझे घर के बाहर ही रहना पड़ता है। जब मैं किसी बाउट में हार जाती हूं तो मुझे घर की सबसे ज्यादा याद आती है। मां से मिलकर मेरी हार का दर्द कम भी हो जाता है। हालांकि इसके बावजूद मुझसे अगर कहा जाए कि कुछ दिन रेसलिंग न करूं तो यह मुझे मंजूर नहीं।

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दिव्या औ्रर विनेश फोगट - फोटो : अमर उजाला
इसके आगे कुछ भी याद नहीं रहता। शायद यहीं कारण है कि चोट के बावजूद मैंने महिला कुश्ती में शानदार वापसी की। लखनऊ को अपना दूसरा घर बताते हुए विनेश ने कहा कि साई सेंटर में आना-जाना लगा रहता है। अब तो यह मेरे दूसरे घर की तरह हो गया है। यहां के स्टाफ की शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया। युवा खिलाड़ियों को सीख देते हुए स्टार पहलवान ने कहा कि मैं सभी से यहीं कहना चाहती हूं कि वक्त बुरा हो या अच्छा आपको कभी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। साथ ही पदक की बजाए हमेशा स्वर्ण जीतने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे परिणाम बेहतर आएगा। 
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विनेश - फोटो : अमर उजाला
मेरे रोल के कौन फिट, बताना मुश्किल 
विनेश से जब पूछा गया कि अगर उनके संघर्ष और सफलता पर फिल्म बनती है तो कौन सी अभिनेत्री उनके किरदार के लिए फिट रहेगी। इस पर उन्होंने कहा कि रेसलर का रोल करना इतना आसान नहीं है। मैं भी परफेक्ट नहीं हूं। मैंने खुद भी गिनी-चुनी फिल्में ही देखी है, लेकिन मेरी कहानी से अगर लोगों को प्रेरणा मिले तो मुझे खुशी होगी। जहां तक मेरे रोल का सवाल है तो मेरी समझ से विनेश के रोल के लिए विनेश ही फिट है।
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