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तीन तलाक बिल में जमानत के प्रावधान पर उलमा व मुस्लिम महिलाओं ने कही ये बात

Fri, 10 Aug 2018 11:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 10 Aug 2018 11:22 AM IST
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ulema and muslim women on triple talaaq.

केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाले मुस्लिम महिला बिल-2017 में संशोधन कर आरोपी को जमानत देने का प्रावधान किया है। जमानत देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास ही रहेगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस बिल को पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मूल भावना के खिलाफ बता चुका है।



उसका मानना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को अवैध घोषित कर दिया है तो आरोपी को जेल कैसे भेजा जा सकता है। बोर्ड का कहना है कि बिल के प्रावधान महिलाओं को राहत देने के बजाये उनकी तकलीफ बढ़ाएंगे। आरोपी के जमानत के प्रावधान में अमर उजाला ने उलमा व एक साथ तीन तलाक के खिलाफ संघर्ष कर रहीं मुस्लिम महिलाओं से उनकी राय जानी।

ulema and muslim women on triple talaaq.
- फोटो : amar ujala

बिल पर संसद का समय बर्बाद कर रही है सरकार
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को अवैध घोषित कर रखा है तो इस पर कानून बनाने की जरूरत ही नहीं। केंद्र सरकार संसद का समय बर्बाद कर रही है और बिल के बहाने महिलाओं का ध्यान उनके वाजिब हक से हटाने की कोशिश कर रही है। इस बिल के प्रावधान पति-पत्नी के रिश्ते को खत्म करने वाले हैं। केंद्र सरकार अगर मुस्लिम महिलाओं की भलाई चाहती है तो उनको शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आरक्षण दिलाए।

बिल में महिलाओं को राहत नहीं

ulema and muslim women on triple talaaq.
- फोटो : amar ujala

शिया चांद कमेटी अध्यक्ष मौलान सैफ अब्बास नकवी का कहना है कि केंद्र सरकार का दावा है कि यह बिल मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न खत्म करने के लिए लाया जा रहा है। जबकि, इसमें महिलाओं को फायदा देने वाला प्रावधान ही नहीं है। एक साथ तीन तलाक पीड़िता की मदद के लिए कोई फंड नहीं बनाया गया है। तलाक के बाद महिलाएं आर्थिक परेशानी झेलती हैं। अदालत में केस चलेगा तो वे वकीलों की फीस कहां से लाएंगी। सरकार को यह तय करना चाहिए कि केस लड़ने के लिए कौन धन खर्च करेगा।

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मुस्लिम वीमेन लीग की महासचिव नाईश हसन - फोटो : amar ujala

गुजारा भत्ते पर सरकार नहीं दे रही है ध्यान
मुस्लिम वीमेन लीग की महासचिव नाईश हसन का कहना है कि तीन तलाक के खिलाफ कानून बनना जरूरी है, लेकिन उसकी खामियां दूर करना उससे भी ज्यादा जरूरी है। केंद्र सरकार ने आरोपी को जमानत का प्रावधान किया है। अभी तो पांच से दस रुपये की चोरी के मामले में आरोपी सालों तक जेल से बाहर नहीं आ पाता। इसलिए इसे मुकम्मल हल नहीं माना जा सकता। तलाक के बाद महिलाओं को आर्थिक परेशानी होती है। पति के जेल में रहने के दौरान पीड़ित महिला और उसके बच्चे के गुजारे की जिम्मेदारी तय नहीं है। सरकार पहले इसका हल निकाले। 

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बज्म-ए-ख्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत - फोटो : amar ujala

अधूरा है संशोधन बिल
बज्म-ए-ख्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत कहती हैं कि बिल में महिलाओं की आर्थिक समस्याओं को लेकर संशोधनों की जरूरत है। महिला व उसके बच्चों के गुजारे की व्यवस्था प्राथमिकता पर होनी चाहिए। वहीं, एक साथ तीन तलाक की केवल शिकायत पर ही जेल भेजना ठीक नहीं है। गिरफ्तारी से पहले जांच करने व अदालत में मामला जाने के बाद सरकारी खर्च पर महिलाओं को वकील मुहैया कराने का प्रावधान भी होना चाहिए।

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