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नाना की जेब में मासूम के शव को ले जाने के लिए नहीं थी फूटी कौड़ी, इन लोगों ने दिया साथ

Fri, 06 Apr 2018 03:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 06 Apr 2018 03:30 PM IST
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two years child died in lucknow
- फोटो : डेमो
मोहनलालगंग के सीएचसी में दो साल के मासूम की मौत ने मजहब की दीवारें तोड़ दीं। नाना की जेब में अपने मासूम के शव को ले जाने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं थी। तब इन लोगों ने साथ देकर शव को घर पहुंचाने में मदद की। पढ़ें आगे की स्लाइड में -
two years child died in lucknow
पीड़ित परिवार - फोटो : amarujala
आलम के गरीब नाना नाजिम उसका शव गोद में लिए सीएचसी के बाहर सड़क पर बैठकर रो रहे थे जिसे देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। जानकारी पाकर पहुंचे इंस्पेक्टर धीरेंद्र प्रताप कुशवाहा व समाजसेवी अचल शुक्ला सहित मौके पर मौजूद हिंदू परिवारों ने आलम के परिवार के लिए अपनी झोली खोल दी। किसी ने रुपये दिए तो किसी ने शव घर ले जाने के लिए गाड़ी का इंतजाम किया। मददगारों का यह रूप देखकर बूढ़े नाना की आंखें बह उठीं।
two years child died in lucknow
डेमो - फोटो : अमर उजाला
इंस्पेक्टर ने बताया कि आलम नगराम के सलेमपुर गांव में रहने वाले मजदूर इसरार का बेटा था। कुछ दिन पहले वह अपनी मां रेशमा के साथ राबयरेली के कुर्री स्थित ननिहाल गया था। बृहस्पतिवार दोपहर वह खेलते-कूदते हुए घर आया तो रेशमा ने उसे लाई-चना खाने के लिए पास बुलाया।
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two years child died in lucknow
डेमो
जैसे ही आलम मां के पास पहुंचा, गश खाकर गिर पड़ा। रेशमा घबराकर चीखने लगीं। आलम के नाना व अन्य परिवारीजन वहां आ गए। आनन-फानन उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया लेकिन आलम को होश नहीं आया। नाजिम उसे लेकर मोहनलालगंज के संजीवनी अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने बच्चों के अस्पताल ले जाने की सलाह दी। गरीब नाजिम के पास फूटी कौड़ी नहीं थी, इसलिए वह उसे मोहनलालगंज सीएचसी लेकर भागे। 
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two years child died in lucknow
- फोटो : डेमो
यहां चिकित्सकों ने आलम को मृत घोषित कर दिया। नाजिम के पास इतने भी रुपये नहीं थे कि वह नाती का शव लेकर घर लौट पाते। वह आलम का शव गोद में लेकर सीएचसी के बाहर ही सड़क किनारे बैठ गए और फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें देखकर भीड़ एकत्र हो गई। किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर व समाजसेवी अचल शुक्ला सहित अन्य लोगों ने उनकी मदद की और रुपये व वाहन की व्यवस्था कर घर भिजवाया।
 
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