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अपनी स्पेशल टीम व चाटुकारों से दूरी बनाकर इन आईपीएस ने तोड़ी अपराध की कमर, ये थी इनकी खास बात

Thu, 27 Sep 2018 04:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 27 Sep 2018 04:37 PM IST
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story of IPS dr.GK goswami
आईपीएस डॉ जीके गोस्वामी - फोटो : amar ujala

लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें डॉ. जीके गोस्वामी की अलग पहचान है। राजधानी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे डॉ. जीके गोस्वामी को मृदु व्यवहार, इंसाफ पसंद और चाटुकारों से दूरी बनाए रखने वाले कप्तान के रूप में याद किया जाता है।  

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आईपीएस डॉ जीके गोस्वामी - फोटो : amar ujala

27 मई 2006 को राजधानी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हुए डॉ. जीके गोस्वामी ने पुलिस अधिकारियों और थानेदारों की पहली बैठक में ही तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को चिह्नित कर लिया। अगले दिन पुलिस उपनिरीक्षकों और सिपाहियों की छंटनी करके टीम बनाई। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र मजबूत करके अपराधियों पर नकेल कसनी शुरू की। मृदुभाषी डॉ. जीके गोस्वामी पीड़ितों की सीधी शिकायत सुनकर उस पर कार्रवाई कराते थे, लेकिन चाटुकारों व सिफारिश करने वालों से दूरी बनाए रखी।

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- फोटो : डेमो
हर संगीन वारदात पर खुद मौके पर जाकर छानबीन करते और पकड़े गए व्यक्ति से पूछताछ करके खुलासे की सत्यता परखते थे। फर्जी खुलासे और बेगुनाह के चालान के सख्त विरोधी डॉ. जीके गोस्वामी ने थानेदारों के साथ क्षेत्राधिकारियों को भी हिदायत दे रखी थी। 
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UP Police
डॉ. जीके गोस्वामी ने थानेदारों को अपने मातहतों के कार्यों पर नजर रखने और क्षेत्राधिकारियों को सर्किल के थानों का दिन में कम से कम एक बार निरीक्षण करने के आदेश दिए। थाने में दर्ज मुकदमों के साथ शिकायती प्रार्थनापत्र भी क्षेत्राधिकारी की नजर में रहते थे।
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आईपीएस डॉ जीके गोस्वामी - फोटो : amar ujala
इसके अलावा अपर पुलिस अधीक्षकों से भी निरीक्षण कराया। थानों में घूसखोरी पर अंकुश लगाने के साथ नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई शुरू कराई। लोग 12 साल बाद भी उन्हें याद करते हैं।  

 
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