शारदा सहायक नहर की पटरी कटने से जलमग्न हुए गांवों का तीसरे दिन पानी निकल गया। हालांकि अभी खेतों में पानी भरा हुआ है। इससे फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कुछ संपर्क मार्ग भी लबालब हैं। गांवों में पानी निकलने के बाद अब तबाही का मंजर नजर आ रहा है। रमुवापुर व बाघपुरवा में 10 कच्चे मकान धराशायी हो गए। वहीं करीब 20 कच्चे घरों को नुकसान पहुंचा है।
शारदा नहर की पटरी कटने से आया सैलाब: 30 घर बर्बाद, पलभर में बह गई सालों में बनाई गृहस्थी, तस्वीरें
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बिसवां-महमूदाबाद मार्ग पर रुसहन पुल के पास सोमवार को दिन में करीब 11 बजे शारदा सहायक नहर की पटरी कट गई थी। इससे नहर का पानी पूरे वेग के साथ आसपास के 16 गांवों में घुस गया था। खेतों में लगी फसलें डूब गईं थीं। पानी इतनी तेजी से गांवों में घुसा था कि लोग भी घरों में फंस गए थे। इसके बाद प्रशासन व एसडीआरएफ की टीम राहत व बचाव कार्य में जुट गई थी। रेस्क्यू कर लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। खबर पाकर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मंडलायुक्ल रोशन जैकब, डीएम अभिषेक आनंद ने हालातों का जायजा लिया था।
हादसे के तीसरे दिन बुधवार को प्रभावित गांवों से पानी तो निकल गया पर कीचड़ के कारण लोगों की दिनचर्या पटरी पर नहीं लौट पाई है। पानी निकलने के बाद अब बर्बादी की तस्वीर दिखाई दी। ब्लाॅक बिसवां क्षेत्र के रमुवापुर में फुल्ली, रेखा देवी, विमला देवी, राकेश, ज्ञानेंद्र, रामरती, सोनापति, राम रानी व प्रदीप के कच्चे मकान गिर गए हैं। बाघपुरवा में लक्ष्मण का कच्चा मकान धराशायी हो गया है। कई लोगों के घरों से बर्तन, राशन व गृहस्थी का सामान पानी के तेज बहाव में बह गया है। जिन लोगों के कच्चे मकान हैं वह अभी राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं।
उधर, पहला ब्लॉक के बजेहरा मार्ग व अहेवा पुल के ऊपर मंगलवार रात से पानी का बहाव शुरू हो गया है। इससे राहगीरों को आवागमन में दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। खेतों में अब तक पानी भरा है। इससे फसलें सड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
घरों में बर्बादी की मंजर देख रो पड़े लोग
पानी निकलने के बाद बुधवार को कई लोग अपने घरों को लौटे। पक्के मकानों पर तो जलभराव का कोई असर नहीं पड़ा लेकिन भीतर का मंजर देख लोग रो पड़े। रमुवापुर निवासी विमला देवी ने बताया कि अचानक पानी भरने से घर छोड़ना पड़ा था। तीसरे दिन जब वापस घर पहुंचे तो बर्बादी का मंजर देख दिल रो पड़ा। सब कुछ तहसनहस हो गया है। पानी में डूबकर राशन, बक्से में रखे कपड़े, बिस्तर, फर्नीचर आदि सब खराब हो गया। अलमारी में रखे कपड़े भी नहीं बच सके। बाघपुरवा की डल्ला देवी ने बताया कि कच्चा मकान था। घर के अंदर पानी भरने से दीवारों में दरारें पड़ गईं। घर में रखा समान व बिस्तर सब बर्बाद हो गया। राशन भी बह गया। रुपये भी बह गए। सालों से जमा की पूंजी बह गई। बाबूराम ने बताया कि अचानक पानी आने से जल्दबाजी में घर छोड़ना पड़ा। कुछ साथ नहीं ले जा सके थे। वापस आकर देखा तो कई सालों में बनाई गई गृहस्थी बर्बाद हो गई है। बक्से में रखे पैसे व जेवर भी बह गए।
फसल चौपट, गुजर-बसर का संकट
शारदा सहायक नहर की पटरी कटने से हजारों बीघा फसलें पानी में डूब गईं हैं। तीन दिन से खेतों में पानी भरा है। कई किसानों की पूरी फसल चौपट हो गई है। ऐसे में इनके सामने गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया है। सद्दूपुर निवासी पवन कुमार ने बताया की एक बीघा खेत है। जिसमें धान लगाया था। खेत में पानी भरने से फसल सड़ रही है। महरिया निवासी मुख्तार अली का तीन बीघा गन्ना बर्बाद हो गया। किसानों का कहना है कि उनकी जीविका का साधन खेती ही है। फसल बर्बाद होने से अब जीविका कैसे चलेगी समझ नहीं आ रहा है।