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प्रॉमिस डेः पूरा करा खुद से किया वादा, ... वे गोलियां चलाते रहे हम तिरंगा लहराते रहे

Mon, 11 Feb 2019 03:47 PM IST
ishwar ashish पुनीत गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
पुनीत गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 11 Feb 2019 03:47 PM IST
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retired captain d.k singh shared his memory on promise day
प्रॉमिस डे - फोटो : amar ujala
वैलेंटाइन वीक ने आधा पड़ाव पार कर लिया है। रविवार को टेडी डे पर लखनऊ के लोगों ने अपनी भावनाएं टेडी गिफ्ट कर जताई। आज प्रॉमिस डे है। हम वादे अपनी जिंदगी में खुद से भी करते हैं और दूसरों से भी। वादा पूरा होने की जो खुशी होती है वह ताउम्र हमें एनर्जी देती है। वादा छोटा-बड़ा नहीं होता। वादा तो बस वादा होता है..।  चाहे वह मोहब्बत में प्रेमिका से किया गया हो या फिर मां, पिता, भाई, बहन, दोस्त या फिर देश से...। प्रॉमिस डे के खास मौके पर आज हम आपकी कुछ जांबाजों से मुलाकात करा रहे हैं, जिन्होंने आन-बान और शान के लिए देश के लिए कुछ कर गुजरने का वादा किया। 
retired captain d.k singh shared his memory on promise day
आशीष चुतर्वेदी, सेवानिवृत्त मेजर - फोटो : amar ujala
देशवासियों ने दिलाया वादा
सर, देश पर हमले का जरूर लेना बदला

संसद पर आतंकी हमले का गुस्सा हर देशवासी को था। पूरा देश एकजुट था। हर जगह लोग इसकी चर्चा कर रहे थे। उसी दौरान सेना की एक टुकड़ी ट्रेन से शिफ्ट हो रही थी। उत्तर प्रदेश के किसी स्टेशन पर ट्रेन रुकी थी। ट्रेन रुकने के कुछ ही देर बाद लोग वहां एकत्र होने लगे। वे सैनिकों और अधिकारियों से कभी खाना तो कभी पानी पूछते। उनका कहना था कि उन्हें सेवा का मौका दें। काफी देर तक गांव वाले खड़े रहे। पूरी भीड़ लग गई। मेरे पास भी कुछ गांव के लोग आए, उन्होंने कहा- सर, संसद पर हमला करने वालों को छोड़ना मत। उन्होंने वादा लिया कि बदला जरूर लेना। हमें देशवासियों का प्यार चाहिए था और वह प्यार हमें खूब मिला। वो माहौल काफी भावुक करने वाला था। मैं कभी भूल नहीं सकता। - आशीष चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त मेजर 
retired captain d.k singh shared his memory on promise day
प्रॉमिस डे - फोटो : amar ujala
याद आते हैं सिक्किम के वे मासूम बच्चे
बात 1995-96 की है। उत्तरी सिक्किम के बिच्छू गांव के पास पोस्टिंग थी। डोगरा रेजीमेंट अपना बैंड बजा रहा था, इसे सुनकर वहां गांव के कुछ बच्चे आ गए। वे सैनिकों से बातें कर रहे थे। उनके आने का सिलसिला चलता रहा। वे सैनिकों से घुल मिल गए। मैंने खुद से वादा किया उनके लिए कुछ करूंगा। मैंने उनके लिए क्लासेज शुरू कर दिया। उन्हें मोटिवेशन कहानियां सुनाने के साथ पढ़ाई-लिखाई की दूसरी बातें करता था। इसके अलावा वहां पास में एक हथकरघा केंद्र भी था। वहां छोटे बच्चे बहुत ही खूबसूरत कढ़ाई करते थे। मैंने वहां भी बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। जब वहां से हम लौटने लगे तो बच्चे उनके माता-पिता सभी नाश्ता लेकर आए थे।
फूलों की हंसी मुस्कान हो इनकी
चांद सितारों से ज्यादा शान हो इनकी
जिंदगी का इनका बस हो एक ही मकसद
आसमां से ऊंची उड़ान हो इनकी
- कैप्टन विजय श्रीवास्तव,
प्रभारी अधिकारी आरटीआई सेल, भूतपूर्व सैनिक संघ, यूपी
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प्रॉमिस डे - फोटो : amar ujala
वे गोलियां चलाते रहे, हम तिरंगा लहराते रहे
भारत-पाक सीमा स्थित जम्मू के राजपुरा में दो ऐसी पोस्ट थीं, जहां बीते दो साल से तिरंगा नहीं लहराया था। वर्ष 1999 में जनवरी की ठंड थी। हमने ठान लिया था कि उन दोनों पोस्ट पर हर हाल में तिरंगा लहराएंगे। हमने आड़ लेने के लिए खाई खोदी और मुहिम में लग गए। दुश्मनों के रेंज में आते ही गोलियां चलने लगती थीं। हमने मिशन पूरा किया और तिरंगा लहरा दिया। इस बीच हमारा हौसला बढ़ा रहे थे वहां के गुर्जर और मुस्लिम नागरिक। हम उनसे आटा मांगते तो वे जिद पर आ जाते और बना कर ही खाना लाते थे। वहां की प्रसिद्ध पलंग तोड़ मिठाई भी हमारी यादों में मिठास घोलती है।
- डीके सिंह, सेवानिवृत्त कैप्टन 
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प्रॉमिस डे - फोटो : amar ujala
शहीदों से किया वादा और कर दिया आतंक का खात्मा
बात वर्ष 1991 की है। पंजाब सहित यूपी के कई इलाके आतंकवाद की चपेट में थे। मैं खीरी के पलिया में सीओ था, तभी खबर मिली कि पड़ोसी जिले पीलीभीत के हजारा के थानाध्यक्ष राजेंद्र सिंह त्यागी सहित पुलिस व पीएसी के छह जवानों को ट्रक समेत ब्लास्ट से उड़ा दिया गया। यह हमला बर्बर खालसा के कुख्यात आतंकी सुखविंदर सिंह के गैंग ने किया था। सर्किल से सटे थाने के प्रभारी के साथ इस घटना के बाद मैं और सभी थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। मेरे साथ अधीनस्थ पलिया का तत्कालीन प्रभारी मुकेश भी था, जो शहीद थानाध्यक्ष त्यागी का ट्रेनिंग मेट और रूम मेट था। उस दृश्य को देखकर एक संकल्प लिया कि हम उनकी शहादत का बदला लेंगे। करीब सात से आठ माह बाद जान की बाजी लगाकर जुलाई 1992 में हमने मुख्य लीडर सहित गैंग के चार आतंकियों को पलिया क्षेत्र में मुठभेड़ में ढेर कर दिया। हमने शहीदों से किया अपना वादा पूरा किया। बाद में हमारी पूरी टीम को राष्ट्रपति की ओर से वीरता के पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।
- आरके चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त आईजी
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